आधुनिक भारत का इतिहास

Sub-आधुनिक भारत

मुगल साम्राज्य का पतन

बहादुरशाह प्रथम (1707-12 ई.)

  • बहादुरशाह प्रथम 65 वर्ष की आयु में मुगल सम्राट बना।
  • उसने मराठों और राजपूतों के प्रति मैत्रीपूर्ण नीति अपनाई तथा मराठा नेता शाहू (शम्भाजी का पुत्र) को 1706 ई. में मुगल कैद से आजाद किया।
  • जोसुआ केटेलार के नेतृत्व में एक डच प्रतिनिधि मण्डल बहादुरशाह के दरबार में आया। इतिहासकार खाफीखाँ ने इसको शाह-ए-बेखबर कहा है।

जहाँदारशाह (1712-13 ई.)

  • जहाँदारशाह, जुल्फिकार खाँ की मदद से सिंहासन पर बैठा और उसे अपना वजीर नियुक्त किया।
  • उसने आमेर के राजा जयसिंह को मिर्जा की उपाधि के साथ मालवा का सूबेदार बनाया तथा मारवाड़ के राजा अजीतसिंह को महाराजा की उपाधि देकर गुजरात का सूबेदार बनाया।
  • जहाँदार ने जजिया बन्द कर दिया।
  • वह अपनी प्रेमिका लाल कुंवर से काफी प्रभावित था।
  • अजीम-उस-शान के पुत्र फर्रूखसियर ने सैय्यद बंधुओं की सहायता से 11 फरवरी, 1713 को जहाँदारशाह की हत्या कर दी।
  • जहाँदारशाह को लोग लापरवाह या लंपट, मूर्ख कहते थे।

फर्रूखसियर (1713-19 ई.)

  • फर्रूखसियर को सैय्यद बंधुओं अब्दुल्ला खाँ एवं हुसैन अली के सहयोग से सिंहासन मिला तथा सैय्यद बंधु नृपनिर्माता कहलाये।
  • इसके काल में सिख नेता बंदा बहादुर को फाँसी दी गई।
  • जानशारेमन के नेतृत्व में ईस्ट इंडिया कंपनी का एक दल 1717 ई. में भारत आया। उसी दल में एक शल्य चिकित्सक हैमिल्टन भी था, जिसने बादशाह को स्वास्थ्य लाभ भी करवाया।
  • फर्रूखसियर ने 1717 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए व्यापारिक लाभ का शाही फरमान जारी किया, जिसे कंपनी का मैग्नाकार्टा कहा गया।
  • फर्रूखसियर, सैयद बंधुओं से मुक्त होना चाहता था, लेकिन सैयद बंधुओं ने पेशवा बालाजी विश्वनाथ से दिल्ली संधि करके मराठों की सहायता से फर्रूखसियर को अंधा करवाकर उसकी हत्या कर दी।
  • सैयद बंधुओं ने रफी-उद-दरजात को गद्दी पर बैठाया। यह सबसे कम समय तक (25 फरवरी से 4 जून, 1719 ई.) शासन करने वाला मुगल बादशाह था।
  • रफी-उद-दरजात की मृत्यु के बाद रफीउद्दौला शाहजहाँ द्वितीय की उपाधि के साथ मुगल बादशाह बना, जिसका शासन 6 जून, 1719 से 17 सितम्बर 1719 ई. तक रहा।
  • उसे दुर्बल और कायर होने के कारण घृणित कायर कहा गया।

मोहम्मद शाह (1719-48 .)

  • मोहम्मदशाह ने 1720 ई. में जजिया कर अंतिम रूप से समाप्त कर दिया।
  • मोहम्मदशाह ने निजामुलमुल्क के नेतृत्व में 1722 ई. में सैयद बंधुओं की हत्या करवा दी।
  • निजामुलमुल्क चिनकिलिज खाँ ने हैदराबाद के स्वतन्त्र आसफजाही वंश की नींव डाली।
  • इसी के काल में अवध (सआदत खाँ), बंगाल (मुर्शीद कुली खाँ), भरतपुर, मथुरा (बदन सिंह), गंगा यमुना दोआब (रूहेल) तथा फर्रूखाबाद में बंगश नवाबों ने अपनी स्वतन्त्र सत्ता की स्थापना कर ली।
  • 1739 ई. में नादिरशाह (फारस का शासक) ने भारत पर आक्रमण किया।
  • 13 फरवरी, 1739 को करनाल युद्ध में नादिरशाह ने मोहम्मद शाह को पराजित किया।
  • नादिरशाह, अवध के नवाब सआदत खाँ के उकसाने पर भारत आया। जब उसने सआदत खाँ से धन माँगा, तो लाचार होकर सआदत खाँ ने विष खाकर आत्महत्या कर ली।
  • नादिरशाह के भारत पर आक्रमण का प्रमुख उद्देश्य धन लूटना था। वह अपने साथ तख्ते ताउस (मयूर सिंहासन) एवं कोहिनूर हीरा, फारस ले गया।
  • मोहम्मद शाह के विलासपूर्ण आचरण के कारण उसे रंगीला कहा गया।

अहमदशाह (1748-54 ई.)

  • इसने अवध के सूबेदार सफदरजंग को अपना वजीर नियुक्त किया।
  • अहमदशाह के शासन काल में अहमदशाह अब्दाली (जिसे दुर्रे दुर्रानी अर्थात् युग का मोती भी कहा जाता है) का भारत पर आक्रमण हुआ।
  • अहमदशाह के समय अब्दाली ने पाँच बार (1748-54 के बीच) आक्रमण किया। इसने कुल मिलाकर सात बार भारत पर आक्रमण किया।

आलमगीर द्वितीय (1754-59 ई.)

  • वजीर इमाद की मदद से अहमदशाह को अपदस्थ कर जहांदार का पुत्र अजीजुद्दीन, आलमगीर द्वितीय की उपाधि के साथ मुगल बादशाह बना।

शाहआलम द्वितीय (1759-1806 .)

  • शाहआलम के काल में बक्सर का युद्ध (1764 ई.) हुआ, जिसे अंग्रेजों ने हेक्टर मुनरो के नेतृत्व में मुगल सेना, अवध के नवाब शुजाउदौला की सेना और बंगाल के अपदस्थ नवाब मीर कासिम की संयुक्त सेनाओं को पराजित किया।
  • इस पराजय के साथ शाहआलम द्वितीय को बंगाल के गवर्नर राबर्ट क्लाइव के साथ इलाहाबाद की संधि करनी पड़ी, जिसके तहत मुगल सम्राट 1765-72 ई. तक अंग्रेजों के संरक्षण में इलाहाबाद में रहा।
  • मराठा सरदार महादजी सिंधिया ने 1772 ई. में एक बार फिर शाहआलम द्वितीय को राजधानी दिल्ली के मुगल सिंहासन पर बैठाया।
  • शाहआलम-IIके शासनकाल में 1761 ई. में पानीपत की तीसरी लड़ाई मराठा और अहमदशाह अब्दाली के बीच हुई।
  • शाहआलम-II (इसका मूल नाम आलीगौहर था) के समय जनरल लेक ने दौलतराव सिंधिया को पराजित कर 1803 ई. में दिल्ली पर अधिकार कर लिया।

अकबर द्वितीय (1806-37 ई.)

  • यह अंग्रेजों के संरक्षण में शासक बनने वाला पहला बादशाह था।
  • उसने राजाराम मोहन को राय की उपाधि प्रदान की।

बहादुरशाह द्वितीय (1837-58 ई.)

  • यह अंतिम मुगल बादशाह था। प्रसिद्ध शायर होने के कारण इसे जफर भी कहा गया।
  • 1857 के विद्रोह में विद्रोहियों का साथ देने के कारण अंग्रेज सरकार ने उसे गिरफ्रतार कर रंगून निर्वासित कर दिया, जहाँ 1862 ई. में उसकी मृत्यु हो गई।

यूरोपीय कंपनियों का भारत आगमन

भारत में यूरोपीय वाणिज्यिक कंपनियों का आगमन 15वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुआ। उनके आगमन का क्रम इस प्रकार है।

                                कम्पनी                 आगम वर्ष

  • पुर्तगाली                  1498 ई.                 
  • डेनिस                     1616 ई.
  • अंग्रेज                     1600 ई.                 
  • फ्रांसीसी                 1664 ई.
  • डच                          1602 ई.                 
  • स्वीडिश                 1731 ई.

पुर्तगाली

  • प्रथम पुर्तगाली वास्कोडिगामा गुजराती पथ प्रदर्शक अब्दुल मुनीद की सहायता से 90 दिनों की समुद्री यात्र के बाद 14 मई, 1498 ई. को कालीकट (केरल) बंदरगाह पर उतरा। वहाँ पर हिन्दू शासक जमोरिन ने उसका स्वागत किया।
  • पेड्रो अल्ब्रेज कैब्राल दूसरा पुर्तगाली था, जो 31 दिसंबर, 1500 ई. में भारत आया।
  • फ्रांसिस्को-डी-अल्मीडा (1505-1509 ई.) प्रथम पुर्तगाली गवर्नर के रूप में 1505 ई. में भारत आया। उसने भारत में शांत जल की नीति (Blue Water Policy) को अपनाया।
  • 1509 ई. में अल्फांसो डी अल्बुकर्क दूसरा गवर्नर बन कर भारत आया। वह भारत में पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
  • उसने कोचीन को अपना मुख्यालय बनाया। 1510 ई. में उसने बीजापुर के शासक युसूफ आदिलशाह से गोवा छीना।
  • 1530 ई. में पुर्तगाली गवर्नर नीनू डी कुन्हा ने कोचीन की जगह गोवा को राजधानी बनाया।
  • पुर्तगाली गवर्नर अल्फांसो डिसूजा के साथ प्रसिद्ध संत फ्रांसिस्को जेवियर भारत आया। उसने सैनथोमा (मद्रास), हुगली (बंगाल) और दीव (काठियावाड़) में पुर्तगाली बस्तियों की स्थापना की।
  • भारत का पहला प्रिंटिंग प्रेस (1556 ई.) में पुर्तगालियों ने गोवा में स्थापित किया।
  • उन्होंने कार्ट्ज-आर्मेडा काफिला पद्धति पर जहाजों के अरब सागर में प्रवेश को नियंत्रित किया।
  • उन्होंने गोथिक स्थापत्य कला का प्रचलन किया।
    • पुर्तगालियों ने 1503 ई. में कोचीन (केरल) अपने पहले दुर्ग और 1505 ई. कन्नूर में दूसरी फैक्ट्री स्थापित की।
    • उन्होंने तम्बाकू की खेती से भारतवासियों को अवगत कराया।
    • पुर्तगाली भारत में सबसे पहले आये और 1961 ई. में गोवा छोड़कर सबसे अंत में गये।

डच (होलैण्डवासी)

  • डच संसद द्वारा 1602 ई. में डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की गई।
  • कोर्नेलियन हाऊटमैन पहला डच यात्री था, जो 1596 ई. में भारत पहुँचा।
  • डच नौसेना नायक वादेर हेग ने 1605 ई. मसुलीपट्टनम में प्रथम डच कारखाना तथा पेत्तोपोली (निजामपत्तनम) में दूसरा कारखाना स्थापित किया।
  • डच स्थापित कुछ अन्य कारखाने पुलीकट (1610 ई.), सूरत (1616 ई.), करिकल (1645 ई.), चिनसुरा (1653 ई.), कोचीन (1663 ई.) ।
  • पुलीकट में डच कारखाने को गेल्ड्रिया का किला तथा चिनसुरा (हुगली) में गुस्ताबुल फोर्ट कहा जाता था।
  • बंगाल में पीपली में पहली डच फैक्ट्री स्थापित की गई, लेकिन शीघ्र ही यह बालासोर स्थानांतरित कर दी गई।
  • डचों ने पुलीकट (जो उनका मुख्यालय था) में स्वर्ण के सिक्के पैगोडा का प्रचलन करवाया।
  • 1759 ई. में अंग्रेजों ने डच को बेदार (प. बंगाल) के युद्ध में पराजित कर भारत में उनकी गतिविधियाँ समाप्त कर दीं।

अंग्रेज

  • इंग्लैंड में मर्चेंट एडवेंचर्स नामक व्यापारियों के एक समूह ने दि गवर्नर एण्ड कंपनी आफ मर्चेंट्स ऑफ लंदन ट्रेडिंग इन टू द ईस्ट इंडीज की स्थापना 1599 ई. में की। महारानी एलिजाबेथ ने 1600 ई. में कंपनी को पूर्व के साथ व्यापार के लिए 15 वर्षों के लिए अधिकार पत्र प्रदान किया।
  • इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में कैप्टन हॉकिन्स, हैक्टर नामक जहाज से भारत आया और जहाँगीर के आगरा स्थित दरबार में पहुँचा। वहाँ उसने बादशाह से फारसी में बात की, जिससे प्रसन्न होकर उसे 400 मनसब एवं इंग्लिश खाँ की उपाधि दी गई।
  • अंग्रेजों ने अपनी प्रथम कंपनी 1611 ई. मसुलीपट्टðनम में स्थापित की।
  • उन्होंने 1612 ई. में पुर्तगालियों को सूरत के निकट स्वाजीहाल में पराजित किया।
  • अंग्रजों ने जहाँगीर की अनुमति से सूरत में पश्चिम भारत की पहली और भारत की दूसरी कंपनी स्थापित की।
  • ब्रिटेन के राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में सर टॉमस रो 18 सितंबर, 1615 को सूरत आया और 10 जनवरी, 1616 को अजमेर में जहाँगीर के दरबार में उपस्थित हुआ।
  • गोलकुण्डा के सुल्तान ने 1632 ई. में अंग्रेजों का सुनहरा फरमान दिया।
  • अँग्रजों ने पूर्वी तट पर अपना कारखाना 1633 ई. में बालासोर एवं हरिहरपुरा में स्थापित किया।
  • 1639 ई. में फ्रांसिस डे नामक अंग्रेज ने चंन्द्रगिरि के राजा से मद्रास पट्टे पर प्राप्त किया और वहाँ पर फोर्ट सेंट जार्ज की स्थापना की।
  • 1651 ई. में ब्रिजमैन ने हुगली में एक कारखाना स्थापित किया।
  • 1616 ई. में पुर्तगालियों ने अपनी राजकुमारी कैथरीन ब्रेगांजा का विवाह ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय से करके मुम्बई को दहेज के रूप में दे दिया।
  • 1669-1677 ई. तक मुम्बई का गवर्नर जेराल्ड आबियार ही मुम्बई का संस्थापक था।
  • बंगाल के सूबेदार शाहशुजा ने 1651 ई. में अंग्रेजों को व्यापार करने का विशेषाधिकार दिया।
  • विलियम हैजेज बंगाल का प्रथम अंग्रेज गवर्नर था।
  • जाब चारनॉक ने बंगाल में तीन गाँव कालिकाता, गोविन्दपुर एवं सुतानाटी को मिलाकर आधुनिक कोलकाता की नींव रखी तथा फोर्ट विलियम का निर्माण किया, जिसका पहला प्रेसीडेंट सर चार्ल्स आयर था।
  • यूरोपीयों की प्रथम फैक्ट्रियाँपुर्तगाली                                :               कोचीन (केरल) (1503)डच                          :               मसुलीपट्टनम (आन्ध्र प्रदेश) (1605)अंग्रेज                     :               मसुलीपट्टनम (1611)डेनिस                     :               ट्रावनकोर (तंजौर) (1620)फ्रांसीसी                 :               सूरत (गुजरात) (1668)

फ्रांसीसी

  • फ्रांस के सम्राट लुई (XIV) के मंत्री कॉलबर्ट द्वारा 1664 ई. फ्रेंच ईस्ट इण्डिया कंपनी की स्थापना हुई, जिसे कम्पने देस इण्दसे ओरिएंटलेस कहा गया।
  • फ्रेंसिस कैरो ने 1668 ई. में सूरत में अपने पहले व्यापारिक कारखाने की स्थापना की। उनकी दूसरी कंपनी मसुलीपट्टनम में स्थापित हुई।
  • 1673 ई. फ्रेंसिस मार्टिन ने पर्दुचुरी नामक एक गाँव प्राप्त किया, जो आगे चल कर पांडिचेरी के नाम से जाना गया।
  • डचों ने पांडिचेरी को छीन लिया, लेकिन रिजविक की संधि के बाद पांडिचेरी पुनः फ्रांसीसियों को मिल गया।
  • बंगाल में मुख्य फैक्ट्री चन्द्रनगर में थी।
  • फ्रांसीसियों ने 1731 में  मॉरीशस, 1724 ई. में मालाबार में स्थित माही तथा 1739 में करिकाल पर अधिकार किया।
  • 1724 ई. में डूप्ले गवर्नर बना। वह भारत में फ्रांसीसी साम्राज्य स्थापित करना चाहता था।
  • अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच कर्नाटक क्षेत्र में कुल तीन युद्ध हुए, जिन्हें आंग्ल-फ्रांसीसी युद्ध (कर्नाटक युद्ध) कहा गया।
  • 22 जनवरी, 1760 को लडे़ गए वाण्डिवाश के युद्ध में फ्रांसीसी सेना पराजित हुई और उसका वर्चस्व भारत में समाप्त हो गया।
  • इस युद्ध में जनरल आयरकूट ने अंग्रेजी सेना का नेतृत्व किया।

कर्नाटक (आंग्लफ्रांसीसी युद्ध)

      युद्ध                                            काल                            संधि                          परिणाम    

  • प्रथम कर्नाटक युद्ध             1746-48 ई.           ए-ला शापेल (1748)            फ्रांसीसी विजयी हुए
  • द्वितीय कर्नाटक युद्ध        1749-54 ई.           पाण्डिचेरी की संधि (1755)  अंग्रेजों का प्रभाव बढ़ा
  • तृतीय कर्नाटक युद्ध            1756-63 ई.           पेरिस की संधि (1763)       वाण्डिवाश के युद्ध के बाद                                                                                                                                   फ्रांसीसी निर्णायक रूप से                                                                                                                                  पराजित हुए

नवीन स्वायत्त राज्य

अवध

  • अवध को अंग्रेजी और मराठा राज्यों के बीच होने के कारण बफर राज्य कहा जाता था।
  • सआदतखाँ बुरहानमुल्क ने अवध को 1732 ई. में स्वतंत्र घोषित किया था।
  • सआदतखाँ के बाद सफदरजंग (अबुल मंसूरखाँ) अवध का नवाब बना और फिर इसका पुत्र शुजाउद्दौला अवध का नवाब (1754 – 1775) बना।
  • शुजाउद्दौला ने वारेन हेसि्ंटग्स के साथ 1773 ई. में बनारस की संधि की।
  • 1775 ई. में अवध के नवाब आसफुद्दौला ने फैजाबाद की जगह लखनऊ को राजधानी बनाया,
  • वहाँ उसने इमामबाड़ा का निर्माण करवाया।
  • वाजिद अली शाह अवध का अंतिम नवाब था।
  • इसी के शासनकाल में अवध पर कुशासन का इल्जाम लगाकर अंग्रजों ने इसे 1856 ई. में ब्रिटिश शासन में मिला लिया।

मैसूर

  • हैदरअली 1755 ई. में डिण्डीगुल के किले का फौजदार बना तथा 1761 ई. में वह मैसूर का शासक बना।
  • हैदरअली ने प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध में अंग्रेजों को हराया।
  • द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध में जनरल आयरकूट ने पोर्टोनोवा के युद्ध (1782 ई.) में हैदर को परास्त किया और अन्ततः हैदर की मृत्यु हो गई।
  • टीपू को अरबी, फारसी, उर्दू एवं कन्नड़ भाषाओं का ज्ञान था।
  • इसने नई मुद्रा, माप तौल की इकाई व नवीन संवत का प्रचलन करवाया।
  • टीपू ने  श्रृंगेरी के जगद्गुरू शंकराचार्य के सम्मान में मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया। साथ ही  श्रृंगेरी मंदिर में देवी शारदा की मूर्ति के निर्माण के लिए धन दिया।
  • इसने फ्रांसीसी क्रांति से प्रभावित होकर श्रीरंगपट्टम में जैकोबियन क्लब की स्थापना की, उसका सदस्य बना। वह स्वयं को नागरिक टीपू कहने लगा।
  • टीपू ने अपनी राजधानी श्रीरंगपट्टनम में फ्रांस और मैसूर के मैत्री का प्रतीक स्वतन्त्रता का वृक्ष लगाया।
  • उसने 1796 ई. में एक नौसेना बोर्ड का गठन किया।
  • टीपू ने द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध में कमान संभाली थी।
  • तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध में कैप्टन मिडोज ने टीपू को पराजित किया और श्रीरंगपट्टनम की संधि की।
  • इस संधि में यह शामिल था कि टीपू अंग्रेजों को तीन करोड़ रुपये देगा, रकम नहीं देने तक टीपू के दो पुत्र अंग्रेजों के कब्जे में रहेंगे।
  • तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध में अंग्रेजी सेना का साथ हैदराबाद निजाम और मराठों की सेना थीं।
  • चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध में टीपू मारा गया।
  • अंग्रेजों ने वाड्यार वंश के बालक कृष्णराज को मैसूर की गद्दी पर बैठाया।
  • मैसूर जीतने की खुशी में लॉर्ड वेलेजली को मार्क्विस की उपाधि मिली थी।

आंग्लमैसूर युद्ध

युद्ध                               मैसूर शासक     गवर्नर/गव. जनरल  संधि                                   परिणाम        

प्रथम (1767-69)       हैदर अली          लार्ड वेरेल्स्ट                  मद्रास की संधि                अंग्रेज पराजित हुए

द्वितीय (1780-84)                              हैदर अली                       वारेन हेस्टिंग्स                 मंगलौर की संधि          हैदर मारा गया

तृतीय (1790-92)      टीपू सुल्तान     लार्ड कार्नवालिस          श्रीरंगपट्टनम की संधि    टीपू पराजित हुआ

चतुर्थ (1794)             टीपू सुल्तान     लार्ड वेलेजली                 सहायक संधि                   टीपू की मृत्यु

पंजाब

  • गुरू गोविंद सिंह की मृत्यु के बाद, उनके शिष्य बंदा बहादुर ने सिखों का नेतृत्व किया।
  • बंदा बहादुर सिखों का पहला राजनीतिक नेता हुआ, जिसने प्रथम सिख राज्य की स्थापना की।
  • 1716 ई. में फर्रूखसियार द्वारा बंदा बहादुर की हत्या कर दी गई।
  • कपूर सिंह के नेतृत्व में 1748 ई. में दल ‘खालसा’ की स्थापना हुई।
  • कपूर सिंह की मृत्यु के बाद जस्सा सिंह अहलूवालिया ने दल खालसा को 12 स्वतंत्र  मिसलों में विभाजित कर दिया, जिसमें भंगी मिसल सबसे शक्तिशाली था।
  • सुरचकिया मिसल को आधुनिक पंजाब निर्माण का श्रेय दिया जाता है।
  • चतरसिंह ने सुकरचकिया मिसल को प्रमुख स्थान दिलाया था।
  • रंजीत सिंह का जन्म 2 नवंबर, 1780 को हुआ। उनके पिता महासिंह थे।
  • रंजीत सिंह सुकरचकिया मिसल के थे।
  • रंजीत सिंह ने भंगी मिसल से लाहौर और अमृतसर छीनकर, लाहौर को अपनी राजधानी बनाया।
  • अफगान के शासक शाहशुजा ने रंजीत सिंह को कोहिनूर हीरा दिया।
  • फौज-ए-आइन, रंजीत सिंह की स्थायी सेना थी।
  • उन्होंने लाहौर में तोप निर्माण का एक कारखाना भी खोला।
  • रंजीत सिंह की सरकार, सरकार-ए-खालसा कहलाती थी।
  • उन्होंने नानकाशाही सिक्के चलवाये।
  • 1839 ई. में रंजीत सिंह की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारियों का क्रम था- खड़ग सिंह, नौनिहाल सिंह, शेर सिंह और दिलीप सिंह।

आंग्लसिख युद्ध

युद्ध                                            सिख शासक                    गवर्नर/गव. जन.     संधि                       परिणाम 

प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध            दिलीपसिंह (वजीर)         लार्ड हार्डिन्ज         लाहौर की संधि        अंग्रेजों ने दिलीपसिंह              (1845-46) लालसिंह,                                                                                                                           को महाराजा की पदवी      सेनापति : तेजा सिंह                                  दी।                                                                  

द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध       दिलीपसिंह (1848-49)   लार्ड डलहौजी        अमृतसर की संधि    दलीपसिंह से कोहिनूर    a. चिलियानवाला का युद्ध                                                  शेर सिंह                                गफ                    –              हीरा लेकर राजमुकुट में b. रामनगर का युद्ध  –                      चार्ल्स नेपियर       –             लगा दिया।                     c. गुजराँवाला का युद्ध   –      –      –

बंगाल

  • स्वतंत्र बंगाल की स्थापना 1717 ई. में मुर्शीद कुली खाँ ने की थी।
  • 1740 ई. में अलीवर्दी खाँ बंगाल का नवाब बना और उसकी मृत्यु के बाद सिराजुदौला बंगाल का नवाब बना।

बंगाल के नवाब

  • मुर्शीद कुली खाँ    1713-27 ई.                          
  • शुजाउद्दीन            1727-39 ई            
  • सरफराज खाँ        1739-40 ई.
  • अलीवर्दी खाँ         1740-56 ई.                          
  • सिराजुद्दौला          1756-57 ई.          
  • मीर जाफर            1757-60 ई.
  • मीर कासिम         1760-63 ई.                          
  • मीर जाफर            1763-65 ई.          
  • निजामुद्दौला         1765-66 ई.
  • शैफुद्दौला               1766-70 ई.                          
  • मुबारक-उद्दौला    1770-73 ई.

सिराजुद्दौला

  • सिराजुद्दौला 10 अप्रैल, 1756 ई. को बंगाल का नवाब बना।
  • सिराजुद्दौला ने अंग्रेजों की कासिम बाजार की फैक्ट्री पर कब्जा कर लिया, अधिकांश अंग्रेज ज्वारग्रस्त फुल्टा द्वीप पर भाग गये।
  • 20 जून, 1756 ई. को काल कोठरी दुर्घटना हुई, जिसमें 146 अंग्रेजों को बंदी बनाया गया और 21 जून को उनमें से मात्र 23 व्यक्ति ही जीवित मिले।
  • अंग्रेजों ने पुनः कलकत्ता पर अधिकार कर लिया। 9 फरवरी, 1757  ई. को अंग्रेजों और नवाब के बीच अलीनगर की संधि हुई।

प्लासी का पहला युद्ध (23 जून, 1757 ई.)

  • प्लासी का पहला युद्ध मुर्शिदाबाद के दक्षिणा में 22 मील दूर नदिया जिले में गंगा नदी के किनारे प्लासी नामक स्थान पर हुआ था।
  • इस युद्ध में अंग्रेजी सेना का नेतृत्व क्लाइव ने किया और नवाब सिराजुद्दौला की सेना का नेतृत्व मीर जाफर, यारलतीफ खाँ और राजा दुर्लभ राय ने किया।
  • अंततः मीर जाफर के पुत्र मीरन के इशारे पर मोहम्मद बेग ने सिराजुद्दौला की हत्या कर दी।
  • प्लासी के युद्ध के समय आलमगीर द्वितीय मुगल बादशाह था।

मीर जाफर

  • सिराजुद्दौला की मृत्यु के बाद, क्लाइव ने 30 जून, 1757  ई. में मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाया।
  • यह अंग्रेजों द्वारा बनाया गया बंगाल का पहला नवाब था।
  • वह एक अयोग्य शासक था, अंग्रेजों ने उसे हटाकर, उसके दामाद मीर कासिम को बंगाल का नवाब बना दिया।

मीर कासिम (1760-1765 .)

  • मीर कासिम ने अपनी राजधानी को मुर्शिदाबाद से मुंगेर हस्तांतरित कर लिया।
  • मीर कासिम ने बंगाल में दस्तक के दुरुपयोग को रोकने के लिए, आंतरिक व्यापार पर सभी प्रकार के शुल्कों की वसूली बंद करवा दी।
  • अंग्रेजों ने इसे अपने विशेषाधिकार की अवहेलना के रूप में लिया और जुलाई, 1763 में मीर जाफर को पुनः बंगाल का नवाब बनाया।
  • मीर कासिम ने बंगाल छोड़कर अवध के नवाब शुजाउद्दौला के यहाँ शरण ली।

बक्सर का युद्ध (22 अक्टूबर, 1764 ई.)

  • बक्सर का युद्ध अंग्रेजों और मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला और मुगल बादशाह शाहआलम द्वितीय की संयुक्त सेनाओं के बीच हुआ।
  • अंग्रेजी सेना का नेतृत्व हेक्टर मुनरो ने किया। अंग्रेज विजयी हुए।
  • इस युद्ध के बाद अंग्रेजों की भारत में वास्तविक सत्ता स्थापित हुई।
  • 12 अगस्त, 1765 ई. को क्लाइव ने शाहआलम से इलाहाबाद की प्रथम संधि की।
  • बंगाल में द्वैध शासन की शुरूआत 1765  ई. में हुई।
  • लियो कार्टिस को द्वैध शासन का जनक माना जाता है, लेकिन 1772  ई. में वॉरेन हेसि्ंटग्स ने बंगाल में द्वैध शासन का अन्त कर दिया।
  • अंग्रेजों ने अपने दीवानी कार्यों को संचालित करने के लिए बिहार में राजा सिताबराय, बंगाल में मो- रजाखान एवं ओडिशा में दुर्लभ राय को नियुक्त किया।
  • अंग्रेजों ने नवाब शुजाउद्दौला के साथ 16 अगस्त, 1765 में इलाहाबाद की द्वितीय संधि की।

सामाजिकधार्मिक पुनर्जागरण

भारत में 19वीं शताब्दी के प्रारम्भ में अनेक समाज सुधार आंदोलनों ने जन्म लिया जो इस प्रकार हैं-

राजा राममोहन राय और ब्रह्म समाज

  • राजा राममोहन राय को भारतीय पुनर्जागरण का जनक माना जाता है।
  • उनका जन्म 22 मई, 1772 ई. को हुगली जिले स्थित राधा नगर में हुआ था।
  • वे अरबी, अंग्रेजी, ग्रीक, फ्रेंच, जर्मन, फारसी, संस्कृत, लैटिन एवं हिब्रू के ज्ञाता थे।
  • 1809 ई. में उन्होंने एकेश्वरवादियों को उपहार (तुहफात-उल-मुवाहिदीन) नामक पुस्तक लिखी।
  • 1820 ई. में प्रीसेप्टस ऑफ जीसस की रचना की।
  • 1814 ई. में उन्होंने आत्मीय सभा एवं 1816 ई. में वेदांत सोसाइटी एवं डेविड हेयर की सहायता से कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की स्थापना की।
  • उन्होंने बंगला भाषा में संवाद कौमुदी एवं फारसी भाषा में मिरातुल अखबार का प्रकाशन किया।
  • 20 अगस्त, 1828 को उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की।
  • मुगल सम्राट अकबरदृप्प् ने उन्हें राजा की उपाधि दी और अपने दूत के रूप में तत्कालीन ब्रिटिश सम्राट विलियम चतुर्थ के दरबार भेजा।
  • यहीं पर ब्रिस्टल में 27 सितंबर, 1833 को उनकी मृत्यु हो गई।
  • उनकी मृत्यु के बाद देवेन्द्रनाथ टैगोर ने ब्रह्म समाज की गतिविधियों को जारी रखा और तत्वबोधिनी सभा की स्थापना की।
  • 1865 में ब्रह्म समाज का विभाजन हुआ- आदिब्रह्म समाज, जिसके प्रमुख देवेन्द्रनाथ थे और केशव चन्द्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज ऑफ इंडिया बना।
  • 1878 में केशव चन्द्र के ब्रह्म समाज ऑफ इंडिया में पुनः विभाजन हुआ और अलग हुए गुट ने साधारण ब्रह्म समाज की स्थापना की।

प्रार्थना समाज

  • केशव चन्द्र सेन से प्रभावित होकर महाराष्ट्र में महादेव गोविन्द रानाडे और आत्माराम पाण्डुरंग ने 1867 में प्रार्थना समाज की स्थापना की।
  • रानाडे को पश्चिम भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अग्रदूत माना जाता है। उन्हें महाराष्ट्र का सुकरात भी कहा जाता है।

वेद समाज

  • केशव चन्द्र की मद्रास यात्र से प्रभावित होकर के. श्रीधरलू नायडू ने 1864 में मद्रास में वेद समाज की स्थापना की।

आर्य समाज

  • आर्य समाज की स्थापना 10 अप्रैल, 1875 को बंबई में माणिका चन्द्र की वाटिका में स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा की गई। 1877 में आर्य समाज का मुख्यालय लाहौर में बना।
  • दयानन्द सरस्वती का जन्म 1824 में गुजरात के काठियावाड़ में हुआ। उनके बचपन का नाम मूलशंकर था।
  • उनके प्रथम गुरु दण्डी स्वामी पूर्णानन्द थे, जिन्होंने मूलशंकर का नाम दयानन्द सरस्वती रखा।
  • वे 1874 में मथुरा में विरजानन्द स्वामी से मिले।
  • दयानन्द ने 1874 में हिन्दी भाषा में सत्यार्थ प्रकाश की रचना की, जिसे आर्य समाज की बाइबल कहा जाता है।
  • उन्होंने ‘वेदों की ओर लौटो’  और ‘भारतवासियों के लिए है’ जैसे नारे दिये।
  • उन्हें भारत का मार्टिन लूथर भी कहा जाता है।
  • उन्होंने हिन्दू धर्म के अंतर्गत शुद्धि आंदोलन चलाया।
  • दयानन्द सरस्वती ने स्वराज शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किया।
  • आर्य समाज के अंतर्गत पाश्चात्य शिक्षा के विरोधियों ने स्वामी श्रद्धानन्द, लेखराम एवं मुंशीराम के नेतृत्व में 1902 में कांगड़ी के पास गुरुकुल की स्थापना की।
  • पाश्चात्य शिक्षा समर्थकों ने हंसराज और लाला लाजपतराय के नेतृत्व में लाहौर में 1889 में दयानन्द एंग्लो वैदिक (DAV) स्कूल की स्थापना की।
  • दयानन्द सरस्वती की मृत्यु 30 अक्टूबर, 1883 को अजमेर में हुई।

यंग बंगाल आंदोलन

  • पाश्चात्य विचारधारा के समर्थक हेनरी विवियन डेरेजियो ने 1826 में इस संगठन की स्थापना की।
  • डेरेजियो को आधुनिक भारत का प्रथम राष्ट्रवादी कवि कहा जाता है।

रामकृष्ण मिशन

  • रामकृष्ण के बचपन का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था और वे कलकत्ता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर के पुजारी थे।
  • स्वामी विवेकानन्द, रामकृष्ण के शिष्य थे। उनका जन्म 1863 में कलकत्ता में हुआ था। उनका मूल नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था।
  • विवेकानन्द ने 1897 में कलकत्ता में बेलूर नामक स्थान पर रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। उसके पूर्व बराहनगर में की थी।
  • विवेकानन्द ने 11 सितंबर, 1893 में अमेरिका के शिकागो के सेंट कोलंबस हॉल में आयोजित प्रथम विश्व धर्म सम्मेलन में हिस्सा लिया। सम्मेलन में जाने से पहले महाराज खेतड़ी के सुझाव पर उन्होंने अपना नाम नरेन्द्र नाथ से बदलकर स्वामी विवेकानन्द रखा।
  • उन्हें मिसेज हॉल नामक महिला के प्रयत्नों से सम्मेलन में प्रवेश मिला।
  • आयरिश महिला मार्गेट नोबेल, विवेकानन्द की शिष्या बनीं, जिन्हें भारत में सिस्टर निवेदिता के नाम से जाना जाता है। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द को योद्धा संन्यासी कहा।

थियोसोफिकल सोसाइटी

  • न्यूयार्क में थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना मैडम ब्लावत्सकी और कर्नल ऑल्काट ने 1875 में की थी।
  • थियोसोफिकल सोसाइटी का अंतर्राष्ट्रीय कार्यालय 1882 में आड्यार (मद्रास) में खोला गया।
  • ऐनी बेसेन्ट 1889 में थियोसोफिकल सोसाइटी की सदस्य बनीं और 1907 में इसकी अध्यक्ष बनीं।
  • ऐनी बेसेन्ट ने 1898 में बनारस में सेन्ट्रल हिन्दू कॉलेज की स्थापना की, जो आगे चलकर 1916 में मदनमोहन मालवीय के प्रयासों से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय बना।

अलीगढ़ आंदोलन

  • सर सैयद अहमद खाँ ने अलीगढ़ आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने पीरी मुरादी प्रथा को खत्म करने की वकालत की।
  • सैयद अहमद खाँ ने तहजीब-उल-अखलक नामक पत्रिका द्वारा अपने विचारों का प्रसार किया। वे पाश्चात्य शिक्षा के समर्थक थे।
  • सैयद अहमद ने 1864 में कलकत्ता में साइंटिफिक सोसाइटी और 1875 में अलीगढ़ मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की, जो 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना।

देवबन्द आंदोलन

  • देवबन्द आंदोलन की स्थापना मुहम्मद कासिम ननौतबी एवं रशीद अहमद गंगोही ने 1867 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबन्द नामक स्थान में की।
  • इस आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य था- कुरान एवं हदीस की शिक्षाओं का मुसलमानों में प्रसार करते हुए विदेशी शासकों के विरुद्ध बगावत जारी रखना।

अहमदिया आंदोलन

  • इसकी स्थापना 1889 में मिर्जा गुलाम अहमद ने किया।
  • इस आंदोलन की शुरूआत गुरुदासपुर जिले के कादियाना नामक स्थान से हुई, इसलिए इसे कादियानी आंदोलन भी कहा जाता है।

सती प्रथा पर प्रतिबंध

  • लार्ड विलियम बेंटिंक के समय 1829 में नियम-XVII  के तहत सती प्रथा को प्रतिबंधित किया गया।

विधवा पुनर्विवाह

  • 1856 के विधवा पुनर्विवाह अधिनियम के नियम-XV द्वारा विवाह को वैध करार देते हुए पैदा होने वाले बच्चों को वैध माना गया। इसके लागू होने के समय भारत का गवर्नर लार्ड कैनिंग था।
  • ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने विधवा पुनर्विवाह की स्थिति में सुधार लाने के लिए अथक प्रयास किये।
  • डी. के. कर्वे ने पूना में विधवा आश्रम की स्थापना की।
  • विष्णु शास्त्री पंडित ने 1850 ई. में विडो रीमैरिज एसोसिएशन की स्थापना की।

शिशु वध प्रतिबंध

  • गवर्नर जनरल जान शोर ने 1785 के बंगाल नियम-XXI एवं 1802 के नियम 45 द्वारा इस प्रथा को सामाप्त करने का प्रयास किया।

नेटिव मैरिज एक्ट

  • 1872 के इस एक्ट द्वारा अंतर्जातीय विवाह को मान्यता प्रदान की गई। यह गवर्नर जनरल नार्थबुक के समय पारित हुआ।

एज आफ कंसेंट एक्ट, 1891

  • इस अधिनियम द्वारा 12 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के विवाह को प्रतिबंधित किया गया।
  • यह अधिनियम बहराम जी मालाबारी के प्रयासों से लैंसडाउन के समय पारित हुआ।

शारदा एक्ट

  • 1929 में हरविलास शारदा के प्रयासों से बाल विवाह निषेध कानून (शारदा एक्ट) बना। इसमें लड़कों के विवाह की उम्र 18 वर्ष एवं लड़कियों की 14 वर्ष निर्धारित की गई।
  • यह लार्ड इरविन के कार्यकाल में पारित हुआ।

नरबलि प्रतिबंध

  • नर बलि प्रथा 1844-45 में हार्डिंग प्रथम के समय में समाप्त हुई ।
  • इस प्रथा को समाप्त करने  के लिए कैम्पबेल की नियुक्ति की गई थी।

दास प्रथा प्रतिबंध

  • इस प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध 1833 चार्टर एक्ट द्वारा लगाया गया।
  • एलनबरो ने 1843 में 5वें अधिनियम द्वारा दासता समाप्त कर दी।

प्रमुख सामाजिकधार्मिक सुधार आंदोलन

आंदोलन/संगठन                            वर्ष             स्थान                           संस्थापक

धर्म सभा                                           1830         बंगाल                           राधाकान्त देव

राधा स्वामी सत्संग                        1861         दयालबाग, आगरा    शिवदयाल साहेब (तुलसीराम)

भारतीय सुधार संघ                         1870         कलकत्ता                   केशव चन्द्र सेन

भारतीय सेवक समाज                   1905         बंबई                             गोपाल कृष्ण गोखले

रहनुमाई मज्दयासन सभा            1851         बंबई                             नौरोजी फुरदोनजी, एस.एस. बंगाली,                                                        जे. बी.वाचा                                                                                                                                                                 राफ्त गोफ्तार नामक पत्रिका का प्रकाशन

देव समाज                                        1887         लाहौर                           शिवनारायण अग्निहोत्री

सेवा सदन                                         1885         बंबई                             बहरामजी मालाबारी

बहिष्कृत हितकारिणी सभा          1924         बंबई                             बी. आर. अम्बेडकर

मद्रास हिन्दू एसोसिएशन             1892         मद्रास                          वीरेशालिंगन पान्तलु

सत्य शोधक समाज                       1873         पुणे                               ज्योतिबा फूले,                फूले द्वारा लिखित पुस्तकें-                                                                                         गुलामगिरी, सार्वजनिक सत्यधर्म

जस्टिस पार्टी                                   1916-17   मद्रास                          सी-एन- मुदालियर, टी.एम. नायर, पी. टी. चेट्टी

हरिजन सेवक संघ                          1932         पुणे                               महात्मा गांधी,                ‘हरिजन’  पत्रिका का प्रकाशन

सेल्फ रिसपेक्ट मूवमेंट                 1925         मद्रास                          ई.वी. रामास्वामी

वायकोम सत्याग्रह                          1924         केरल                            टी.के. माधवन, पेरियार रामास्वामी,

                                                                                                                     एन. कुमारन

गुरु वायूर सत्याग्रह                         1931         केरल                            के. पिल्लई, ए.के. गोपालन, बी. सुब्रह्मण्यम

डिप्रेस्ड क्लास मिशन सोसाइटी   1931         बंबई                             बी. आर. शिंदे

1857 का विद्रोह

  • 1857 के विद्रोह के पीछे सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक व तात्कालिक कारक जिम्मेदार थे। इस विप्लव का तात्कालिक कारण चर्बी वाला कारतूस था।
  • भारत में 1856 के अंत में इनफील्ड राइफलों का प्रयोग शुरू हुआ, जिसमें चर्बी युक्त कारतूसों का उपयोग होता था।
  • 29 मार्च, 1857 को बैरकपुर की छावनी में 34वीं एनआई रेजिमेंट के मंगल पांडे ने लेफ्टिनेंट बाग और जनरल ह्यूसन की हत्या कर दी।
  • मंगल पांडे बलिया का रहने वाले थे। इस घटना के बाद उन्हें फाँसी दे दी गई थी।

1857 का विद्रोह एवं उसके नेतृत्वकर्ता

केन्द्र            नेतृत्वकर्ता                                                 काल                दमनकर्ता                   दमन तिथि

दिल्ली         बहादुरशाह जफर, बख्तखाँ                    11 मई, 1857  निकलसन, हडसन   21 सितम्बर, 1857

कानपुर        तांत्या टोपे (रामचन्द्र पांडुरंग)               4 जून, 1857   कैम्पबल हैबेलॉक     6 सितम्बर, 1857                      नाना साहेब (धोंधू पंत)

लखनऊ       बेगम हजरत महल, बिरजिस कादिर   4 जून, 1857   कैम्पबल                     31 मार्च, 1858           

झांसी           रानी लक्ष्मीबाई                                         5 जून, 1857   जनरल ह्यूरोज          3 अप्रैल से 17 जून, 1858

जगदीशपुर कुंवर सिंह, अमर सिंह                              12 जून, 1857मे. विलियम टेलर     दिसंबर, 1858

फैजाबाद     मोलवी अहमदुल्ला                                  जून, 1857      जनरल रेनार्ड              5 जून, 1858

इलाहाबाद   लियाकत अली                                          जून, 1857      कर्नल नील                 1858

बरेली            खान बहादुर खाँ                                        जून, 1857      जनरल रेनार्ड              1858

विद्रोह का प्रसार

  • विद्रोह 10 मई, 1857 को मेरठ से शुरू हुआ। 20 एनआई तथा एलसी की पैदल सैन्य टुकड़ी 11 मई को दिल्ली पहुँची और मुगल बादशाह बहादुर शाह को अपना नेता घोषित किया।
  • विद्रोह के मुख्य केन्द्र दिल्ली, झाँसी, कानपुर, लखनऊ और आरा (बिहार) थे।

प्रमुख तथ्य

  • 1857 के विद्रोह के समय इंग्लैंड के प्रधानमंत्री विस्कॉट पालमेर्स्टन थे, और भारत का गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग था एवं ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया थीं।
  • तात्यां टोपे को उनके जमींदार मित्र मानसिंह ने धोखा देकर पकड़वा दिया, जिसके बाद उन्हें फाँसी दे दी गई।
  • असम में मनीराम दत्त, कोटा में जयदयाल और हरदयाल, ओडिशा में राजकुमार उज्जवल शाही और सुरेन्द्र शाही, पंजाब में वजीर खाँ, कुलू में राणा प्रतापसिंह और वीरसिंह ने विद्रोह किया।
  • क्रांति की विफलता का मुख्य कारण-  एकता, संगठन और साधनों की न्यूनता, विद्रोही गतिविधियों का कुछ क्षेत्र तक ही सीमित रहना आदि कारण थे।
  • वी. डी. सावरकर ने 1908 में मराठी भाषा में ‘फर्स्ट वार ऑफ इंडियन इंडिपेन्डेंस’  नामक पुस्तक लिखी।
  • भारतीय इतिहासकार अशोक मेहता ने अपनी पुस्तक ‘द ग्रेट रिबैलियन’  में इसे राष्ट्रीय विद्रोह कहा।
  • डा. सुरेन्द्रनाथ सेन ने ‘एट्टीन फिफ्टी सेवन’  लिखी। उन्हें 1857 के संग्राम का सरकारी इतिहासकार भी माना जाता है।
  • 1857 विद्रोह के बाद भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों से निकलकर ब्रिटिश क्राउन के हाथों में चला गया।
  • 1 नवम्बर, 1858 को इलाहाबाद में लार्ड कैनिंग ने महारानी विक्टोरिया की उद्घोषणा को पढ़ा, जिसे स्टैनली ने तैयार किया था। इसके बाद गवर्नर जनरल कैनिंग को वायसराय की उपाधि प्राप्त हुई।
  • 1858 की उद्घोषणा के बाद पील कमीशन की सिफारिशों के अनुसार भारतीय सैनिकों और यूरोपीय सैनिकों की संख्या का अनुपात  5 : 1 से घटाकर  2 : 1 कर दिया गया।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विभिन्न चरण

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को निम्नलिखित तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है। जैसे-

                 (1)         प्रथम चरण (1885-1905)

                 (2)         द्वितीय चरण (1905-1919)

                (3)          तृतीय चरण (1919-1947)

राष्ट्रवादी आंदोलन का प्रथम चरण  (1885-1905)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में एक अवकाश प्राप्त अंग्रेज अधिकारी एलन अक्टोवियन ह्यूम द्वारा की गई थी।
  • ह्यूम ने 1884 में भारतीय राष्ट्रीय संघ की स्थापना की थी, जिसका प्रथम अधिवेशन 28 दिसम्बर, 1885 मुम्बई स्थित ग्वालिया टैंक मैदान के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत विद्यालय में आयोजित किया गया था।
  • इस अधिवेशन में कुल 72 सदस्यों ने हिस्सा लिया था।
  • इसी सम्मेलन में दादाभाई नौरोजी के सुझाव पर भारतीय राष्ट्रीय का नाम बदलकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस रखा गया।
  • व्योमकेश बनर्जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष थे।
  • सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के संगठन नेशनल कांफ्रेंस का विलय कांग्रेस में 1886 में हुआ। इस समय भारत का वायसराय लार्ड डफरिन था एवं ब्रिटेन का प्रधानमंत्री ग्लैडस्टोन था।

कांग्रेस से जुडे़ विवादित वक्तव्य

  • कर्जन: कांग्रेस लड़खड़ाकर गिर रही है, भारत में रहते हुए मेरी इच्छा है कि मैं उसे शांतिपूर्वक मरने में मदद कर सकूँ।
  • बंकिम चन्द्र चटर्जी: कांग्रेस के लोग पद के भूखे हैं।
  • तिलक: यदि वर्ष में एक बार मेढक की तरह टर्राएंगे, तो कुछ नहीं मिलेगा।
  • लाला लाजपत राय: कांग्रेस लार्ड डफरिन के दिमाग की उपज है।
  • अश्विनी कुमार दत्त: कांग्रेस के सम्मेलन तीन दिन का तमाशा है।
  • विपिन चन्द्र पाल: कांग्रेस याचना करने वाली संस्था है।
  • महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को समाप्त करने का सुझाव दिया था।

अन्य तथ्य

  • कांग्रेस ने ए. ओ. ह्यूम की मृत्यु के बाद, 1912 में उन्हें कांग्रेस का जनक घोषित किया।
  • नरमपंथी नेता दादाभाई नौरोजी को ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया कहा जाता था।
    • कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष: डब्लू. सी. बनर्जी (मुम्बई, 1885)।
    • कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष: बदरूद्दीन तैयबजी (मद्रास, 1887)।
    • कांग्रेस  के  प्रथम  अग्रेज  अध्यक्ष: जार्ज यूले (इलाहाबाद, 1888)।
    • प्रथम महिला जिसने कांग्रेस अधिवेशन को संबोधित किया: कादम्बिनी गांगुली (कलकत्ता 1890)।
    • कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष: ऐनी बेसेन्ट (कलकत्ता, 1917)
    • सबसे ज्यादा समय तक अध्यक्ष: मौलाना अबुल कलाम आजाद (1940-45)।
    • भारत की स्वतंत्रता के समय अध्यक्ष: जे. बी. कृपलानी।
    • अंग्रेज अध्यक्ष: जार्ज यूले (इलाहाबाद, 1888), विलियम वेडरबर्न (बंबई, 1889, इलाहाबाद, 1910), अल्फ्रेड वेब (मद्रास, 1894), हेनरी कॉटन (बंबई, 1904)।

कांग्रेस के प्रमुख अधिवेशन

बनारस अधिवेशन (1905)

अध्यक्ष: गोपालकृष्ण गोखले।

  • कर्जन की बंगाल विभाजन की नीति का विरोध हुआ और लाला लाजपत राय ने पहली बार सत्याग्रह अपनाने का विचार रखा।

कलकत्ता अधिवेशन (1906)

अध्यक्ष: दादाभाई नौरोजी।

  • नरमपंथी एवं गरमपंथी में मतभेद उभरा। नरमपंथी रासबिहारी घोष को एवं गरमपंथी लाला लाजपत राय को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाना चाहते थे, लेकिन अंत में दादाभाई नौरोजी को अध्यक्ष बनाया गया।

सूरत अधिवेशन (1907)

  • इस अधिवेशन में रासबिहारी घोष को अध्यक्ष बनाया गया।
  • मतभेदों के कारण कांग्रेस में विभाजन हो गया।

लखनऊ अधिवेशन (1916)

अध्यक्ष: अम्बिका चरण मजूमदार।

  • ऐनी बेसेन्ट एवं तिलक के प्रयासों से कांग्रेस पुनः एकीकृत हुई।
  • कांग्रेस एवं मुस्लिम लीग के बीच समझौता हुआ।

लाहौर अधिवेशन (1929)

अध्यक्ष: जवाहर लाल नेहरू।

  • पूर्ण स्वाधीनता का प्रस्ताव पारित किया गया।
  • लाहौर में रावी के तट पर, 31 दिसंबर, 1929 की रात्रि को झंडा फहराया गया।

करांची अधिवेशन (1931)

अध्यक्ष: वल्लभभाई पटेल।

  • गांधी-इरविन समझौता।
  • गांधी ने कहा था ‘गांधी मर सकता है, परन्तु गांधीवाद नहीं’ ।

त्रिपुरी अधिवेशन (1939)

अध्यक्ष: पहले सुभाष चन्द्र बोस, फिर राजेन्द्र प्रसाद।

महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच विवाद गहरा गया।

सुभाष चन्द्र बोस ने इस्तीफा देकर 1939 में फारवर्ड ब्लाक की स्थापना की।

कांग्रेस के अधिवेशन

अधिवेशन            वर्ष          अध्यक्ष                                           स्थान                       टिप्पणी

पहला                     1885      डब्ल्यू. सी. बनर्जी                        मुम्बई                      72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया

दूसरा                     1886      दादाभाई नौरोजी                          कोलकाता                डफरिन द्वारा उद्यान भोजन

तीसरा                    1887      बदरूद्दीन तैयबजी                        चेन्नई                      प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष

चौथा                      1888      जार्ज यूले                                       इलाहाबाद                प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष

पाँचवाँ                   1889      विलियम वेडरबर्न                        मुम्बई                            –

छठवाँ                    1890      फिरोजशाह मेहता                        कोलकाता                     –

सातवाँ                   1891      पी. आनन्द चार्लू                          नागपुर                           –

आठवाँ                   1892      डब्ल्यू. सी. बनर्जी                        इलाहाबाद                     –

नौवाँ                       1893      दादाभाई नौरोजी                          लाहौर                             –

दसवाँ                     1894      अल्फ्रेड वेब                                    चेन्नर्द                      कांग्रेस संविधान का निर्माण

ग्यारहवाँ               1895      सुरेन्द्रनाथ बनर्जी                        पूणे                                 –

बारहवाँ                  1896      रहमतुल्ला सयानी                       कोलकाता                पहली बार वन्देमातरम् गाया                                                                                                गया

तेरहवाँ                   1897      सी. शंकरन नायर                         अमरावती                     –

चौदहवाँ                 1898      आनन्द मोहन बोस                     चेन्नई                           –

पन्द्रहवाँ                1899      रोमेश चन्द्र दत्त                          लखनऊ                         –

सोलहवाँ                1900      एन.जी. चन्द्रावरकर                   लाहौर                            –

सत्रहवाँ                  1901      दीनशा ई वाचा                              कोलकाता                     –

अठारहवाँ              1902      सुरेन्द्रनाथ बनर्जी                        अहमदाबाद                  –

उन्नीसवाँ             1903      लालमोहन घोष                            चेन्नई                           –

बीसवाँ                   1904      सर हेनरी काटन                           मुम्बई                            –

इक्कीसवाँ             1905      गोपालकृष्ण गोखले                    वाराणसी                       –

बाइसवाँ                 1906      दादाभाई नौरोजी                          कोलकाता                कांग्रेस के मंच पर स्वराज शब्द का                                                                      पहली बार प्रयोग

तेइसवाँ                  1907      डॉ. रासबिहारी बोस                      सूरत (स्थगित)      कांग्रेस का प्रथम विभाजन 1907                                                                           का अधिवेशन, कांग्रेस अधिवेशनों                                                                  में नहीं गिना जाता।

तेइसवाँ                  1908      डॉ. रासबिहारी बोस                      चेन्नई                      कांग्रेस के संविधान का निर्माण

चौबीसवाँ              1909      मदन मोहन मालवीय                 लाहौर                       –

पच्चीसवाँ             1910      विलियन वेडरबर्न                         इलाहाबाद                –

छब्बीसवाँ             1911      बिशन नारायणधर                      कोलकाता                जन-गण-मन पहली बार गाया                                                                               गया

सत्ताइसवाँ          1912      आर. एन. मुधोलकर                   बांकीपुर                    –

अट्ठाइसवाँ             1913      नवाब सैयद मोहम्मद बहादुर   कराची                      –

उन्तीसवाँ             1914      भूपेन्द्रनाथ बसु                            चेन्नई                      इसमें मद्रास प्रांत के गवर्नर लार्ड                                                                           पोटलैंड मौजूद थे

तीसवाँ                   1915      सत्येन्द्र प्रसाद सिन्हा                 मुम्बई                      लार्ड वेलिंगटन ने भाग लिया

इकत्तीसवाँ          1916      अंबिका चरण मजूमदार             लखनऊ                    कांग्रेस एक हुई, कांग्रेस-मुस्लिम                                                                           लीग समझौता

बत्तीसवाँ              1917      ऐनी बेसेन्ट                                    कोलकाता                कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष

तैंतीसवाँ                1918      मदन मोहन मालवीय                 दिल्ली                      इस अधिवेशन के पूर्व पहली बार                                                                           1918 में सैयद हसन इमाम की                                                                          अध्यक्षता में विशेष अधिवेशन                                                                       बुलाया गया था

चौंतीसवाँ              1919      मोतीलाल नेहरू                            अमृतसर                       –

पैंतीसवाँ                1920      सी वी. राधवाचारियर                  नागपुर                     असहयोग आन्दोलन पारित हुआ

छत्तीसवाँ             1921      हकीम अजमल खाँ                      अहमदाबाद                  –

सैंतीसवाँ               1922      सी. आर. दास                               गया                                –

अड़तीसवाँ            1923      मौलाना मुहम्मद अली               काकीनाडा                    –

विशेष अधिवेशन                1923                                               अबुल कलाम आजाद दिल्ली   सबसे कम उम्र के अध्यक्ष

उन्नतालीसवाँ     1924      महात्मा गांधी                               बेलगांव                          –

चालीसवाँ              1925      सरोजनी नायडू                             कानपुर                     पहली भारतीय महिला अध्यक्ष

इकतालीसवाँ       1926      श्रीनिवास आयंगर                       गुवाहाटी                   प्रत्येक कांग्रेसी को खादी पहनना                                                                          आवश्यक।

बयालीसवाँ           1927      एम. ए. अंसारी                              चेन्नई                      कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज को लक्ष्य                                                                             बनाया।

तेतालीसवाँ           1928      मोतीलाल नेहरू                            कोलकाता                     –

चौवालीसवाँ         1929      जवाहरलाल नेहरू                        लाहौर                       पूर्णस्वाधीनता का प्रस्ताव पारित।

पैंतालीसवाँ           1931      वल्लभभाई पटेल                         कराची                      गांधी-इरविन पैक्ट को मंजूरी                                                                                               मिली।

छियालीसवाँ        1932      अमृत रणछोड़दास                      दिल्ली                           –

सैंतालीसवाँ          1933      नेल्ली सेनगुप्ता                           कोलकाता                     –

अड़तालीसवाँ       1934      राजेन्द्र प्रसाद                               मुम्बई          –

उनचासवाँ            1936      जवाहरलाल नेहरू                        लखनऊ                         –

पचासवाँ                1937      जवाहरलाल नेहरू                        फैजपुर (बंगाल)      गाँव में सम्पन्न अधिवेशन

इक्यावनवाँ           1938      सुभाषचंद्र बोस                             हरिपुरा (गुजरात)        –

बावनवाँ                 1939      सुभाषचंद्र बोस/राजेन्द्र प्रसाद  त्रिपुरी (म. प्र.)              –

तिरेपनवाँ              1940ए   मौलाना अबुल कलाम आजाद  रामगढ़                     1941-45 के बीच कोई अधिवेशन                                                                          नहीं हुआ

चौवनवाँ                1946      आचार्य जे. बी. कृपलानी            मेरठ                          स्वाधीनता के समय अध्यक्ष                               1947 में कोई अधिवेशन नहीं हुआ                                                                    इसलिए कृपलानी ही स्वतन्त्रता के                                                                                                                         समय अध्यक्ष थे।

पचपनवाँ              1948      बी. पट्टाभि सीतारमैया                जयपुर                      इसका आरम्भ वन्देमातरम एवं                                                                           राष्ट्रगान से हुआ।

छप्पनवाँ               1950      बी. पुरुषोत्तम दास टंडन           नासिक                          –

प्रमुख संगठन

संस्था                                             वर्ष          संस्थापक                                                                                     स्थान

लैण्ड होल्डर्स सोसाइटी               1838      द्वारिका नाथ टैगोर                                                                   कोलकाता

बंगाल ब्रिटिश एसोसिएशन       1843      द्वारिका नाथ टैगोर                                                                   कोलकाता

ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन     1851      राजेन्द्र लाल, राधाकांत देव, देवेन्द्र नाथ टैगोर                    कोलकाता

ईस्ट इंडिया एसोसिएशन           1866      दादाभाई नौरोजी                                                                         लंदन

नेशनल इंडिया एसोसिएशन      1867      मैरी कारपेंटर                                                                                लंदन

इंडियन सोसाइटी                         1872      आनंद मोहन बोस                                                                       लंदन

इंडियन एसोसिएशन                   1876      सुरेन्द्र नाथ बनर्जी एवं आनंद मोहन बोस                              कोलकाता

भारतीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस             1883      सुरेन्द्र नाथ बनर्जी                                                                      कोलकाता

मद्रास महाजन सभा                   1884      सी-वी- राधवाचारियर, एस- अयर एवं पी आनंद चारलू      चेन्नई

बाम्बे प्रेसीडेन्सी एसोसिएशन   1885      फिरोजशाह मेहता, तेलंग एवं तैयबजी                                   मुम्बई

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस             1885      ए. ओ. ह्यूम                                                                                 मुम्बई

सर्वेंटस ऑफ इंडिया सोसाइटी  1905      गोपाल कृष्ण गोखले                                                                  मुम्बई

होम रूल लीग                                1916      ऐनी बेसन्ट व तिलक                                                                 पुणे

उत्तर प्रदेश किसान सभा          1918      इन्द्र नारायण, मालवीय एवं गौरी शंकर                                 लखनऊ

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी         1920      एम. एन. राय                                                                               ताशकंद

अवध किसान सभा                     1920      रामचन्द्र, नेहरू, गौरी शंकर                                                      प्रतापगढ़

भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस     1920      संस्थापक- एम.एन. जोशी, अध्यक्ष- लाला लाजपत राय  लखनऊ

स्वराज पार्टी                                 1923      मोतीलाल नेहरू व सी- आर- दास                                            दिल्ली

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ             1925      के.पी. हेडगेवार                                                                             –

खुदाई खिदमतदगार                  1929      खान अब्दुल गफ्रफार खान                                                       पेशावर

कांग्रेस समाजवादी पार्टी            1934      आचार्य नरेन्द्र देव, जयप्रकाश नारायण                                 –

प्रगतिशील लेखक संघ                1936      प्रेमचंद                                                                                           लखनऊ

अखिल भारतीय किसान सभा  1936      एन. जी. रंगा व सहजानंद सरस्वती                                        लखनऊ

फारवर्ड ब्लाक                               1939      सुभाष चन्द्र बोस                                                                         कोलकाता

रेडिकल डेमोक्रेटिक दल             1940      एम. एन. राय                                                                               कोलकाता

क्रांतिकारी समाजवादी दल       1942      सौम्येन्द्र नाथ टैगोर                                                                   कोलकाता

राष्ट्रवादी आंदोलन का द्वितीय चरण (1905-1919)

बंगाल का विभाजन  (1905)

  • बंगाल विभाजन का निर्णय कर्जन द्वारा 1905 में लिया गया।
  • बंगाल को बाँटने का प्रस्ताव 3 दिसम्बर, 1903 को ब्रिटिश संसद में रखा गया। 20 जुलाई, 1905 को बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा हुई और 16 अक्टूबर, 1905 को बंगाल का विभाजन की योजना प्रभावी हुई।
  • विभाजन के बाद एक भाग में पूर्वी बंगाल और असम सम्मिलित थे, जिसकी राजधानी ढाका थी। लेफ्रिटनेंट ब्लूमफिल्ड फूलर यहाँ का प्रथम गवर्नर था।
  • दूसरा भाग पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा मिलाकर बना था। यहाँ की राजधानी कलकत्ता थी और यहाँ का पहला गवर्नर एण्ड्रयू फ्रेजर था।
  • 16 अक्टूबर, 1905 को पूरे बंगाल में शोक दिवस के रूप में मनाया गया। रबीन्द्रनाथ टैगोर के आह्नान पर इस दिन को ‘राखी दिवस’ के रूप में मनाया गया।
  • 1905 को कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का अनुमोदन किया गया।
  • रबीन्द्रनाथ टैगोर ने इसी समय आमार सोनार बंगला नामक गीत लिखा, जो वर्तमान में बांग्लादेश का राष्ट्रगान है।
  • अवनीन्द्र नाथ टैगोर ने 1906 में भारतीय प्राच्यकला संस्थान की स्थापना की।
  • स्वदेशी आन्दोलन के प्रचार-प्रसार के लिए अश्विनी कुमार दत्ता ने बारीसल में स्वदेशी बांधव समिति की स्थापना की।
  • 15 अगस्त, 1906 को राष्ट्रीय शिक्षा परिषद् की स्थापना हुई।
  • आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय ने बंगाल केमिकल्स स्वदेशी स्टोर खोला।
  • कांग्रेस के 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी ने पहली बार स्वराज शब्द का उल्लेख किया। (स्वराज शब्द का पहली बार प्रयोग दयानन्द सरस्वती ने किया।)
  • स्वदेशी आंदोलन का नेतृत्व दिल्ली में सैयद हैदर रजा, मद्रास में चिदंबरम पिल्लै, पूणे व मुम्बई में तिलक, पंजाब में लाला लाजपत राय ने किया।
  • इस समय हितवादी, संजीवनी व बंगाली जैसे समाचार पत्रों द्वारा विभाजन का विरोध किया गया।

कांग्रेस का विघटन  (1907)

  • कांग्रेस 1907 के सूरत अधिवेशन में उदारवादी रासबिहारी घोष को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाना चाहते थे, लेकिन गरमपंथी लाला लाजपत राय को अध्यक्ष बनाना चाहते थे। अंततः रासबिहारी घोष अध्यक्ष बनने में सफल हुए।
  • इस अधिवेशन में, 1906 के कोलकाता अधिवेशन में पास करवाये गये 4 प्रस्तावों- स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा एवं स्वशासन को लेकर विवाद गहरा गया और गरमपंथी एवं उदारवादियों के बीच संघर्ष के कारण अन्ततः कांग्रेस में विभाजन हो गया।

मुस्लिम लीग की स्थापना (1906)

  • बंगाल विभाजन की घोषणा के बाद 3 अक्टूबर, 1906 को आगा खाँ के नेतृत्व में मुसलमानों का एक शिष्टमंडल वायसराय लार्ड मिंटो से शिमला में मिला।
  • अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना की घोषणा 30 दिसम्बर, 1906 को नवाब सलीमुल्लाह के नेतृत्व में ढाका में आयोजित एक बैठक में की गई। इसके प्रथम अध्यक्ष नवाब वकार-उल-मुल्क मुश्ताक हुसैन थे।
  • 1908 में अमृतसर में आयोजित मुस्लिम लीग की बैठक में (अध्यक्ष- सर सैयद इमाम) मुसलमानों के लिए एक अलग निर्वाचन मंडल की माँग की गई, जिसकी पूर्ति 1909 के मार्ले मिंटो सुधार द्वारा हुआ।

मार्ले मिन्टो सुधार  (1909)

  • यह 15 नवम्बर, 1909 को राजकीय अनुमोदन के बाद भारतीय परिषद् अधिनियम 1909 के नाम से लागू हुआ।
  • इसमें मुसलमानों को पृथक निर्वाचन मंडल की सुविधा प्रदान की गई।

दिल्ली दरबार  (1911)

  • दिल्ली दरबार का आयोजन 1911 में वायसराय लार्ड हार्डिंग द्वितीय के समय ब्रिटिश सम्राट जार्ज पंचम एवं महारानी विलियन मैरी के भारत आगमन पर उनके स्वागत हेतु किया गया।
  • अरूण्डेल कमेटी की सिफारिश पर बंगाल का विभाजन 12 दिसम्बर, 1911 को रद्द घोषित किया गया।
  • 1 अप्रैल, 1912 को दिल्ली भारत की नई राजधानी बनी।
  • बंगाल विभाजन रद्द होने से बिहार और ओडिशा बंगाल से अलग हो गये। असम पुनः 1874 की स्थिति में आ गया, अब असम में सिलहट भी शामिल था।

दिल्ली

  • आधुनिक दिल्ली की रूपरेखा एडविन लुटियन्स ने हरबर्ट बेकर के साथ मिलकर तैयार की ।
  • लुटियन्स ने दिल्ली में वायसराय भवन (वर्तमान में राष्ट्रपति भवन) संसद भवन, इंडिया गेट आदि का निर्माण कराया।
  • लार्ड इरविन वायसराय भवन में निवास करने वाले पहले वायसराय थे।

प्रथम विश्व युद्ध  (1914)

  • प्रथम विश्व युद्ध 28 जुलाई, 1914 को शुरू हुआ, जिसमें एक तरफ जर्मनी, आस्ट्रिया, इटली और टर्की थे तथा दूसरी ओर फ्रांस, रूस, इंग्लैंड और जापान थे।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस विश्व युद्ध में ब्रिटिश साम्राज्य का समर्थन किया।
  • गांधीजी ने लंदन में एम्बुलेंस कोर बनाई, जो युद्ध में घायल सैनिकों को ढोता था।

लखनऊ समझौता  (1916)

  • कांग्रेस का लखनऊ अधिवेशन (अध्यक्ष: अंबिका चरण मजूमदार)  दो दृष्टि से महत्वपूर्ण थाµ
    • कांग्रेस से निष्कासित गरमपंथियों को कांग्रेस में पुनः प्रवेश।
    • कांग्रेस-मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक लखनऊ समझौता।
  • लीग के लखनऊ अधिवेशन, 1916 की अध्यक्षता मोहम्मद अली जिन्ना ने की थी।

होमरूल लीग आंदोलन

  • ऐनी बेसेन्ट और तिलक ने मिलकर होमरूल लीग आंदोलन शुरू किया।
  • तिलक द्वारा 28 अप्रैल, 1916 को बेलगाँव (पूना) में होमरूल लीग की स्थापना की गई। जोसेफ बपतिस्ता इसके अध्यक्ष एवं एन.सी. केलकर इसके सचिव थे। तिलक की होमरूल का कार्यक्षेत्र कर्नाटक, महाराष्ट्र (मुम्बई को छोड़कर) मध्य प्रांत, बरार था।
  • तिलक ने मराठा (अंग्रेजी भाषा में) और केसरी (मराठी भाषा में) नामक दो पत्रें से लीग के कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार किया।
  • ऐनी बेसेन्ट ने अपनी लीग की स्थापना सितम्बर, 1916 में की। शेष भारत ऐनी के कार्य क्षेत्र में था। ऐनी बेसेन्ट ने जार्ज अंरूडेल को होमरूल लीग संगठन का सचिव बनाया और अड्यार (मद्रास) में लीग का मुख्यालय स्थापित किया।
  • मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू एवं तेज बहादुर, सप्रू भी बेसेन्ट की लीग से जुडे़ थे।
  • ऐनी बेसेन्ट ने ‘न्यू इंडिया’ एवं ‘द कामनवील’ पत्रिका का प्रकाशन किया।
  • लीग की सर्वाधिक शाखाएँ मद्रास में थीं।
  • गोखले की सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी के सदस्यों को लीग में प्रवेश की अनुमति नहीं थी।
  • वेलेन्टाइन शिरोल ने अपनी पुस्तक ‘इंडियन अनरेस्ट’ में तिलक को भारतीय अशांति का जनक कहा था, जिसके लिए तिलक ने उन पर मानहानि का मुकदमा किया।

मांटेग्यू घोषणा  (1917)

  • मांटेग्यू घोषणा, भारतीय सरकार अधिनियम 1919 का आधार बनी। इस घोषणा को उदारवादियों ने भारत के मैग्नाकार्टा की संज्ञा दी।
  • तिलक ने मांटेग्यू घोषणा को सूर्य विहीन उषाकाल कहा।
  • 1919 के अधिनियम द्वारा प्रान्तों में द्वैध शासन प्रणाली लागू हुई और पहली बार लोक सेवा आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया।
  • पृथक निर्वाचन मंडल में मुसलमानों के अलावा सिखों और गैर-ब्राह्मणों को भी शामिल किया गया।

क्रांतिकारी आंदोलन का प्रथम चरण (1905-1915)

महाराष्ट्र

  • महाराष्ट्र के पुणे जिले के चितपावन ब्राह्मणों को भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन शुरू करने का श्रेय दिया जाता है।
  • 22 जून, 1897 को दामोदर एवं बालकृष्ण चापेकर ने पुणे के प्लेग कमिश्नर रेण्ड एवं एमहर्स्ट की हत्या की। हत्या के आरोप में चापेकर बंधुओं को फाँसी दे दी गई।
  • विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) एवं गणेश सावरकर ने 1899 में गुप्त संस्था मित्र मेला का गठन किया, जिसे 1904 में ‘अभिनव भारत समाज’ कहा जाने लगा।
  • अनन्त लक्षण कन्हारे ने नासिक के जिला मजिस्ट्रेट जैक्सन की गोली मारकर हत्या कर दी। तिलक ने इस हत्या की तुलना शिवाजी द्वारा अफजल खाँ की हत्या से की। इसके बाद तिलक को 18 माह की सजा हुई।
  • तिलक ऐसे पहले व्यक्ति थे, जिन्हें पत्रकारिता के कारण सजा हुई।

बंगाल

  • बंगाल के पहले क्रांतिकारी संगठन अनुशीलन समिति की स्थापना 1902 में मिदनापुर में ज्ञानेन्द्र नाथ बसु एवं कोलकाता में जतीन्द्र नाथ बनर्जी, भूपेन्द्रनाथ दत्त एवं बारीन्द्र नाथ घोष द्वारा की गई।
    • इन्होंने ‘युगान्तर’ नामक साप्ताहिक समाचार-पत्र का प्रकाशन किया। इसी समय ब्रह्मबान्धव उपाध्याय द्वारा संध्या एवं अरविन्द घोष द्वारा वन्देमातरम् प्रकाशित किया गया।
  • प्रफुल्ल चाकी एवं खुदीराम बोस ने मुजफ्रफरपुर के मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड की हत्या का प्रयास किया। प्रफुल्ल चाकी ने आत्महत्या कर ली एवं खुदीराम बोस को फाँसी दी गई।
  • रासबिहारी बोस ने लार्ड हार्डिंग पर फेंके गये बम की योजना बनाई थी।
  • बारीन्द्र घोष एवं अरविन्द घोज पर अलीपुर षड़यंत्र केस के तहत मुकदमा चलाया गया। अरविंद घोष को उचित साक्ष्य के अभाव में छोड़ दिया गया और उन्होंने आंतकवाद क्रियाकलापों से अलग होकर पांडिचेरी में अपना आश्रम औरोविले स्थापित कर लिया।

पंजाब

  • अजीत सिंह ने लाहौर में अंजुमने मोहिब्बाने वतन नामक संस्था स्थापित की और भारत माता नामक अखबार प्रकाशित किया।

विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन की गतिविधियाँ

  • श्यामजी कृष्ण वर्मा ने 1905 में लंदन में इंडिया होमरूल सोसाइटी की स्थापना की। इस सोसाइटी ने इंडियन सोसिऑलाजिस्ट नामक पत्रिका का प्रकाशन किया और इंडिया हाउस नामक हॉस्टल की स्थापना की।
  • इंडिया हाउस के सदस्य मदनलाल ढींगरा ने 1 जुलाई, 1909 को कर्जन वाइली की हत्या कर दी।
  • मैडम भीखाजी कामा, जिन्हें भारतीय क्रांति आन्दोलन की माँ भी कहा जाता है, ने 1907 में स्टुटगार्ट जर्मनी में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा लिया और राष्ट्रीय ध्वज को फहराया।

गदर पार्टी (1913)

  • सोहन सिंह बाखना ने हिन्द एसोसिएशन ऑफ अमेरिका की स्थापना की। इस संस्था ने गदर नाम से एक अखबार निकाला, जिससे इसका नाम भी गदर पार्टी पड़ गया।
  • गदर पार्टी की स्थापना 1913 में लाला हरदयाल ने की थी। इसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) था।
  • गदर आंदोलन ने सैन फ्रांसिस्को में युगान्तर आश्रम की स्थापना की थी।
  • राजा महेन्द्र प्रताप ने जर्मनी के सहयोग से काबुल में 1915 में अंतरिम भारत सरकार की स्थापना की।
  • कामागाटामारू (1914) रू यह एक जापानी जहाज था, जिसे प्रवासी भारतीयों को कनाडा पहुँचाने के लिए किराये पर लिया गया था, लेकिन उन्हें कनाडा नहीं उतरने दिया गया और वापस कलकत्ता लाया गया।
  • यात्रियों के अधिकार के लिए सोहनलाल पाठक के नेतृत्व में शोर कमेटी का गठन किया गया।

भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन का तृतीय चरण (1919-47)

  • गांधीजी 9 जनवरी, 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आये।
  • वे फरवरी-मार्च 1915 में शांति निकेतन में रहे, जहाँ रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें महात्मा की उपाधि प्रदान की और गांधीजी ने भी रवीन्द्रनाथ टैगोर को गुरुदेव कहना शुरू कर दिया ।
  • गोपालकृष्ण गोखले को गांधीजी ने अपना राजनीतिक गुरु बनाया।
  • ब्रिटिश सरकार ने 9 जनवरी, 1915 को गांधीजी को केसर-ए-हिन्द की उपाधि प्रदान की थी।
  • गांधीजी ने अपनी पुस्तक हिन्द स्वराज में स्वराज की विस्तृत व्याख्या की।
  • उन्होंने नवजीवन (गुजराती)  एवं यंग इंडिया (अंग्रेजी) का संपादन किया।
  • उन्होंने हरिजन पत्र का प्रकाशन 1933 में आरम्भ किया।
    • द स्टोरी ऑफ माई एक्सपेरिमेंट्स विद् ट्रुथ, गांधीजी की आत्मकथा है।
  • गांधीजी का सर्वप्रिय भजन ‘वैष्णव जन को तैनू कहिए’ की रचना नरसिंह मेहता ने की थी।
  • गांधीजी ने अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे साबरमती आश्रम की स्थापना की।

      संक्षिप्त परिचय : महात्मा गांधी (1869-1948)

  • मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को पोरबंदर में हुआ। उनके पिता करमचंद गांधी एवं माता पुतलीबाई थीं।
    • गांधीजी का विवाह 1883 में कस्तूरबा के साथ हुआ। उनके चार पुत्र हरिलाल, रामदास, मणिलाल और देवदास थे।
    • 1889 से 1891 तक उन्होंने इंग्लैंड में रहकर कानून की पढ़ाई की।
    • 1892 में दक्षिण अफ्रीका के एक व्यापारी दादा अब्दुला के मुकदमें की पैरवी हेतु गांधीजी दक्षिण अफ्रीका गये।

            गांधीजी : दक्षिण अफ्रीका

  • 1894: नटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना
    • 1903: इंडियन ओपिनियन नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन
    • 1904: फीनिक्स आश्रम की स्थापना
    • 1905: टालस्टाय फार्म की स्थापना (जोहान्सबर्ग)
  • गांधीजी की हत्या 30 जनवरी, 1948 को दिल्ली के बिड़ला भवन में प्रार्थना सभा में जाते हुए नाथुराम गोडसे ने कर दी।

विशेष: वर्ष 2012 में सूचना के अधिकार में पूछे गये प्रश्न के उत्तर में यह ज्ञात हुआ कि भारत सरकार द्वारा महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की आधिकारिक उपाधि प्रदान नहीं की गई है।

गांधीजी द्वारा प्रथम तीन आन्दोलनों का नेतृत्व

भारत में 1917 से 1918 के बीच गांधीजी ने तीन आन्दोलनों का नेतृत्व किया :

  • चंपारण सत्याग्रह (1917): किसानों को तीन कठिया पद्धति के अंतर्गत जमीन के 3ध20 भाग पर नील की खेती करनी पड़ती थी और यूरोपियों द्वारा तय किये मूल्य पर उसे बेचना पड़ता था।
  • गांधीजी ने राजकुमार शुक्ल के कहने पर चंपारण में हस्तक्षेप किया और सत्याग्रह के आधार पर किसानों की परेशानियाँ कम हुईं।
  • अहमदाबाद मिल मजदूर हड़ताल (1918): मिल मजदूरों और मिल मालिकों के बीच प्लेग बोनस को लेकर विवाद था। गांधीजी के अनशन के बाद मिल मालिकों ने 35%बोनस देना स्वीकार किया।
  • खेड़ा सत्याग्रह (1918): खेड़ा के किसान फसल नष्ट हो जाने के कारण लगान को स्थगित करना चाहते थे, परन्तु सरकार तैयार नहीं थी।
  • गांधीजी, विट्टलभाई पटेल, वल्लभभाई पटेल और इंदुलाल याग्निक के साथ खेड़ा पहुँचे और किसानों का समर्थन किया, जिसके फलस्वरूप सरकार को झुकना पड़ा।

रॉलेक्ट एक्ट (1919)

  • बढ़ती हुई क्रांतिकारी गतिविधियों को कुचलने के लिए सरकार को रॉलेट समिति के सुझावों पर ‘रॉलेट एक्ट’ या ‘द अनार्किकल एण्ड रिवोल्यूशनरी’  क्राइम एक्ट, 1919 बनाया।
    • इसके तहत अंग्रेज सरकार जिसको चाहे बिना मुकदमा चलाये जेल में बंद कर सकती थी।
    • इसे बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील का कानून कहा गया।
  • स्वामी श्रद्धानन्द ने 30 मार्च, 1919 को दिल्ली में आंदोलन की कमान संभाली।

जलियाँवाला बाग हत्याकांड (1919)

  • अमृतसर के जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को (बैसाखी का दिन)  किचलू, सत्यपाल की गिरफ्रतारी के विरुद्ध एक शांतिपूर्ण सभा का आयोजन किया गया।
  • सभा स्थल पर मौजूद जनरल डायर ने बिना किसी सूचना के भीड़ पर गोली चलवा दी, जिसमें लगभग 1,000 लोग मारे गये।
  • इसके विरोध में रबीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘नाइट’  की उपाधि वापस कर दी। वायसराय की कार्यकारणी के सदस्य शंकर नायर ने त्यागपत्र दे दिया।
  • सरकार ने हत्याकांड की जाँच के लिए हंटर आयोग गठित किया।

खिलाफत आंदोलन

  • भारत के मुसलमान तुर्की के सुल्तान को खलीफा मानते थे, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने 10 अगस्त, 1920 को सम्पन्न सीवर्स की संधि द्वारा तुर्की का विभाजन कर दिया।
  • 7 अक्टूबर, 1919 को खिलाफत दिवस मनाया गया।
  • 23 नवम्बर, 1919 को दिल्ली में खिलाफत आंदोलन का अधिवेशन हुआ, जिसकी अध्यक्षता गांधीजी ने की।
  • 20 जून, 1920 में इलाहाबाद में हुई हिन्दू-मुस्लिम नेताओं की संयुक्त बैठक में असहयोग आंदोलन को चलाये जाने का निर्णय लिया गया।

असहयोग आंदोलन (1920-22)

  • असहयोग आंदोलन चलाये जाने का निर्णय सितम्बर, 1920 में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में कोलकाता के विशेष अधिवेशन में लिया गया।
  • महात्मा गांधी ने असहयोग प्रस्ताव स्वयं पेश किया।
  • 1920 के नागपुर अधिवेशन में असहयोग आंदोलन चलाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
  • नागपुर अधिवेशन के समय अध्यक्ष विजय राघवाचार्य थे तथा असहयोग के प्रस्ताव को सी. आर. दास ने प्रस्तुत किया था।
  • गांधीजी ने अहसहयोग आंदोलन 1 अगस्त, 1920 को शुरू किया। इसी दिन तिलक की मृत्यु हो गई।
  • तिलक स्मारक के लिए तिलक स्वराज कोष की स्थापना की गई।
  • गांधीजी ने ब्रिटिश शासन द्वारा दी गई उपाधियाँ- केसर-ए-हिन्द, जूलू युद्ध पदक एवं बोअर पदक लौटा दिये। जमनालाल बजाज ने राय बहादुर की उपाधि लौटा दी।
  • विदेशी वस्त्रें की होली जलाये जाने को रबीन्द्रनाथ टैगोर ने निष्ठुर बर्बादी की संज्ञा दी।

चौरी-चौरा कांड (1922)

  • 5 फरवरी, 1922 को चौरी-चौरा (गोरखपुर) नामक स्थान पर आंदोलनकारियों ने पुलिस के 22 जवानों को थाने के अन्दर जिन्दा जला दिया।
  • गांधीजी ने 12 फरवरी, 1922 को बारदोली में हुई बैठक में असहयोग आंदोलन को समाप्त कर दिया।
  • गांधीजी को 10 मार्च, 1922 को गिरफ्रतार कर असंतोष फैलाने के आरोप में 6 वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई।

स्वराज पार्टी (1923)

  • असहयोग आंदोलन की समाप्ति के बाद, कांग्रेस में एक नई विचारधारा ने जन्म लिया, जिसके सूत्रधार मोतीलाल नेहरू एवं सी. आर. दास थे।
  • इन्हें परिवर्तनवादी कहा गया, क्योंकि ये विधान मंडल में प्रवेश करके आंदोलन को आगे बढ़ाना चाहते थे।
  • वहीं दूसरी तरफ अपरिवर्तनवादी, जिसमें सी. राजगोपालाचारी, डा. राजेन्द्र प्रसाद, वल्लभभाई पटेल आदि थे, विधान मंडल में प्रवेश नहीं चाहते थे।
  • कांग्रेस के 1922 के गया अधिवेशन (अध्यक्ष सी. आर. दास) में मोतीलाल नेहरू और सी. आर. दास ने कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया और मार्च, 1923 में इलाहाबाद में कांग्रेस खिलाफत स्वराज पार्टी की स्थापना की।
  • इसके अध्यक्ष सी. आर. दास एवं महासचिव मोतीलाल नेहरू थे।
  • नवम्बर 1923 के चुनावों में स्वराजियों ने केन्द्रीय विधानमंडल में 101 सीटों में से 42 पर कब्जा किया।
  • प्रांतीय विधानमंडलों में स्वराजियों को मध्यप्रांत में स्पष्ट बहुमत, बंगाल में सबसे बड़े दल के रूप में तथा मुम्बई एवं उत्तर प्रदेश में संतोजजनक सफलता मिली।
  • स्वराजियों की एक और बड़ी उपलब्धि थी कि 1925 में विट्ठलभाई पटेल को केन्द्रीय विधानमंडल का अध्यक्ष चुना गया।
  • 16 जून, 1925 में सी. आर. दास की मृत्यु के बाद स्वराज पार्टी कमजोर होने लगी।
  • अक्टूबर, 1924 में सचिन्द्रनाथ सान्याल, जोगेश चटर्जी व रामप्रसाद बिस्मिल ने कानपुर में हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की।
    • इस संस्था ने 9 अगस्त, 1925 को लखनऊ के काकोरी नामक स्थान पर 8 डाउन ट्रेन पर डकैती डाली और सरकारी खजाने को लूट लिया।
    • इस घटना को काकोरी कांड कहा जाता है।
    • इस घटना में रामप्रसाद बिस्मिल, असफाक उल्ला, रोशनलाल व राजेन्द्र लाहिड़ी को फांसी दी गई। चन्द्रशेखर आजाद गायब हो गये।
  • 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की गई। इसके संस्थापक चन्द्रशेखर आजाद, भगतसिंह, सुखदेव एवं भगवती चरण वोहरा आदि थे।
  • 1928 में साइमन कमीशन का विरोध करते समय पंजाब केसरी लाला लाजपत राय की पिटाई के कारण मृत्यु हो गई। भगतसिंह, राजगुरु और चन्द्रशेखर आजाद ने इसका बदला सांडर्स की हत्या करके लिया।
  • यह घटना लाहौर षड़यंत्र कहलाती है।
  • भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली के केन्द्रीय विधानमंडल में जिस समय पब्लिक सेफ्रटी बिल और ट्रेड डिसप्यूट बिल पर बहस चल रही था, बम फेंका।
    • इसी समय भगत सिंह ने इन्कलाब जिन्दाबाद का नारा लगाया था।
    • मुहम्मद इकबाल ने सर्वप्रथम अपनी पुस्तक ‘बंग-ए-दर्रा’ में इन्कलाब शब्द का प्रयोग किया था।
  • 23 मार्च, 1931 को लाहौर षड़यंत्र केस में भगतसिंह, सुखदेव व राजगुरु को फाँसी दे दी गई।
  • 27 फरवरी, 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस मुठभेड़ के दौरान चन्द्रशेखर आजाद ने स्वयं को गोली मारकर शहीद हो गये।
  • बंगाल में सूर्यसेन ने इंडियन रिपब्लिकन आर्मी की स्थापना की, जिसने 18 अप्रैल, 1930 को पुलिस शस्त्रगार एवं सहायक सैनिक शस्त्रगार पर कब्जा कर लिया। यह घटना चट्टðगांव पुलिस शस्त्रगार कांड कहलाता है।
  • इस घटना के कुछ समय बाद सूर्यसेन को पकड़ कर फाँसी दे दी गई।
  • सचिन्द्र सान्याल ने ‘बंदी जीवन’ एवं भगवती चरण वोहरा ने ‘फिलासफी ऑफ बॅम्ब’ की रचना की थी।
  • कु. बीना दास ने 1932 में विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में गवर्नर पर 5 बार गोली चलायी, लेकिन असफल रहीं।

साइमन कमीशन  (1927)

  • साइमन कमीशन का गठन 8 नवंबर, 1927 को जॉन साइमन की अध्यक्षता में किया गया। इसके सभी सदस्य ब्रिटिश संसद के अंग्रेज थे, इसलिए इसे श्वेत कमीशन भी कहा गया।
  • इस कमीशन ने 27 मई, 1930 को अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

नेहरू रिपोर्ट  (1928)

  • भारत सचिव लार्ड बर्केनहेड ने भारतीयों को यह चुनौती दी कि वे एक ऐसा संविधान बनायें, जो सभी दल को मंजूर हों।
  • इस परिपेक्ष्य में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति बनाई गई। यह रिपोर्ट 10 अगस्त, 1928 को प्रस्तुत की गई।
  • इसमें 19 मूल अधिकारों को प्रतिपादित किया गया था।

लाहौर अधिवेशन  (1929)

  • लाहौर अधिवेशन के दौरान रावी नदी के तट पर 31 दिसम्बर, 1929 की आधी रात को जवाहरलाल नेहरू ने तिरंगा झंडा फहराया।
  • 26 जनवरी, 1930 को आधुनिक भारत के इतिहास में प्रथम स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया गया।
  • इसी समय पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव पारित किया गया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन

  • फरवरी, 1930 में साबरमती आश्रम में हुई कांग्रेस की बैठक में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने की बागडोर गांधीजी के हाथ में सौंपी गई।
  • गांधीजी ने यंग इंडिया के माध्यम से वायसराय के समक्ष 11 सूत्री माँगें रखी।

दाण्डी यात्रा

  • गांधीजी ने 12 मार्च, 1930 को अपने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से दाण्डी (नौसारी, गुजरात) तक 400 किमी. की यात्रा की और 6 अप्रैल, 1930 को दाण्डी में नमक कानून का उल्लंघन किया, इसके साथ ही देशभर में यह आंदोलन शुरू हो गया।
    • तमिलनाडु में सी. राजगोपालाचारी ने तिरुचेनगोंड आश्रम से त्रिचुरापल्ली के वेदारण्यम तक नमक यात्र की।
    • उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत में आंदोलन का नेतृत्व खान अब्दुल गफ्रफार खां (सीमांत गांधी) ने किया।
    • खान के नेतृत्व में खुदाई खिदमतगार/लाल कुर्ती आंदोलन चलाया गया।
    • खान ने ‘पख्तून’  नामक पत्रिका का प्रकाशन किया।
    • मणिपुर और नागालैंड में जादोनाग नागा के नेतृत्व में ‘जियालरंग’  आंदोलन चलाया गया। बाद में रानी गाइदिन्ल्यू ने इसे नेतृत्व प्रदान किया।
  • 4 मई, 1930 की रात को गांधीजी को गिरफ़्तार कर येरवादा जेल भेज दिया गया।
  • गांधीजी की गिरफ़्तारी के बाद सरोजनी नायडू और इमाम साहेब ने धरसाना (महाराष्ट्र) के नमक कारखाने पर धावा बोला।
  • पुलिस के अत्याचार को देख अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर ने कहा- ‘मैंने इतना कष्टदायक अत्याचार कभी नहीं देखा था।’
  • इस आंदोलन के दौरान 1930-31 में बच्चों की ‘बानर सेना’ व लड़कियों की ‘मंजरी सेना’ का गठन किया गया था।

प्रथम गोलमेज सम्मेलन

  • यह सम्मेलन 12 नवम्बर, 1930 से 13 जनवरी, 1931 को हुआ था।
  • भारत का 89 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल वायसराय आफ इंडिया नामक जहाज से सम्मेलन में भाग लेने के लिए लंदन गया।
  • इस सम्मेलन का उद्घाटन जार्ज पंचम ने किया तथा अध्यक्षता रैम्जे मैकडोनाल्ड ने की। कांग्रेस ने इस सम्मेलन में भाग नहीं लिया।

गांधी-इरविन समझौता

  • यह समझौता 5 मार्च, 1931 को हुआ था। इसे दिल्ली समझौता भी कहा जाता है।
  • एम. आर. जयकर, तेजबहादुर सप्रू और श्रीनिवास शास्त्री के प्रयासों से गांधी-इरविन समझौता हुआ।
  • इस समझौते के अंतर्गत सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित किया गया, भारतीयों को नमक बनाने का अधिकार मिला और गांधीजी ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने का फैसला किया।
  • कराची में कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में (अध्यक्ष: वल्लभभाई पटेल) गांधी-इरविन समझौते को स्वीकार किया गया।
  • सरोजनी नायडू ने गांधी तथा  इरविन को दो महात्मा कहा था।

दूसरा गोलमेज सम्मेलन

  • दूसरा गोलमेज सम्मेलन 7 सितम्बर से 2 दिसम्बर, 1931 को हुआ था।
  • इस सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि गाँधीजी थे। वे एस. एस. राजपूताना नामक जहाज से लंदन गये। इस दौरान गांधीजी ने लंदन में किंग्सेहॉल में प्रवास किया।
  • यह सम्मेलन साम्प्रदायिक समस्या पर विवाद होने के कारण पूरी तरह असफल रहा।

द्वितीय सविनय अवज्ञा आंदोलन

  • लन्दन से भारत वापिस आकर गांधीजी ने लार्ड वेलिंगटन से मिलना चाहा, लेकिन वायसराय ने मिलने से मना कर दिया।
  • 4 जनवरी, 1932 को आंदोलन शुरू होने के कुछ ही घंटों में गांधी, नेहरू, गफ्फार खां आदि शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया और कांग्रेस को गैर कानूनी संस्था घोषित कर दिया गया।

सांप्रदायिक पंचाट  (1932)

  • ब्रिटिश प्रधानमंत्री मैकडोनाल्ड ने 16 अगस्त, 1932 को साम्प्रदायिक पंचाट की घोषणा की।
  • इसमें पृथक निर्वाचक पद्धति दलित वर्गों पर भी लागू किया गया था।

पूना समझौता

  • सांप्रदायिक पंचाट के विरुद्ध गांधीजी ने येरवदा जेल में 20 सितम्बर, 1932 को आमरण अनशन शुरू कर दिया।
  • मदनमोहन मालवीय, राजगोपालाचारी, डा. राजेन्द्र प्रसाद के प्रयासों से महात्मा गांधी व भीमराव अंबेडकर के बीच 23 दिसम्बर, 1932 को पूना समझौता हुआ।
  • इसके अंतर्गत प्रांतीय विधान मंडलों में दलित वर्ग के लिए 71 की जगह 148 सीटें और केन्द्रीय विधानमंडल में 18% सीटें आरक्षित की गईं।

तीसरा गोलमेज सम्मेलन

  • यह सम्मेलन 17 नवम्बर से 24 दिसम्बर, 1932 को सम्पन्न हुआ था।
  • इसमें कुल 46 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, कांग्रेस इसमें शामिल नहीं हुई।
  • तेजबहादुर सप्रू व अम्बेडकर तीनों गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले नेता थे।

गांधीजी और हरिजनोत्थान

  • गांधीजी ने 1932 में हरिजन कल्याण हेतु अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग की स्थापना की।
  • उन्होंने ‘हरिजन’ नामक साप्ताहिक पत्र का भी प्रकाशन किया।
  • उन्होंने  7 नवंबर, 1933 में वर्धा से हरिजन यात्र प्रारंभ की।

भारत सरकार अधिनियम, 1935

  • इस अधिनियम में भारत में संघात्मक शासन व्यवस्था की बात की गई।
  • यह अधिनियम अंग्रेजों द्वारा भारत में लागू किया गया अंतिम संवैधानिक प्रयास था, जो सबसे अधिक समय तक कार्यरत रहा।

प्रांतीय चुनाव और मंत्रिमंडल का गठन (1937)

  • 1935 के अधिनियम के अंतर्गत 1937 में प्रांतीय चुनाव हुए।
  • कांग्रेस, जिसका चुनाव चिह्न पीला बक्सा था, को पाँच प्रांतों बिहार, ओडिशा, मद्रास, मध्य प्रांत एवं संयुक्त प्रांत में पूर्ण बहुमत मिला।
  • कांग्रेस मुम्बई, असम तथा उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। केवल पंजाब, सिन्धु और बंगाल में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिल पाया।
  • बंगाल में कृषक पार्टी और मुस्लिम लीग की गठबंधन सरकार बनी।
  • 28 माह के शासन के बाद 1 सितंबर, 1939 को द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण कांग्रेस मंत्रिमंडलों द्वारा त्यागपत्र दिया गया।
  • इस त्यागपत्र के बाद मुस्लिम लीग ने अंबेडकर के साथ मिलकर 22 दिसंबर, 1939 को मुक्ति दिवस मनाया।

कांग्रेस समाजवादी पार्टी

  • आचार्य नरेन्द्रदेव, जयप्रकाश नारायण और अच्युत पटवर्धन ने 1934 में कांग्रेस समाजवादी पार्टी की स्थापना की।

देशी रियासतों के प्रति ब्रिटिश नीति

  • भारत में छोटी-बड़ी  562 देशी रियासतें थी।
  • 1906 के बाद ब्रिटिश शासन ने देशी नरेशों के प्रति अधीनस्थ सहयोग की नीति अपनाई।
  • इनमें सबसे बड़ी रियासत हैदराबाद व सबसे छोटी रियासत बिलवारी की थी।
  • 1920 में असहयोग आंदोलन के समय रियासतों में प्रजामंडल या राज्यों की जनता के सम्मेलनों की स्थापना हुई।
  • 1927 में गठित बटलर समिति, भारतीय रियासत और भारत सरकार के सम्बन्धों पर विचार करने के लिए बनी थी।
  • 1939 में अखिल भारतीय राज्य जन सम्मेलन के अध्यक्ष पं. जवाहरलाल नेहरू बने।

अगस्त प्रस्ताव  (1940)

  • कांग्रेस ने 1940 के रामगढ़ अधिवेशन में प्रस्ताव पारित किया कि यदि भारत सरकार एक अंतरिम राष्ट्रीय सरकार का गठन करे, तो कांग्रेस द्वितीय विश्वयुद्ध में ब्रिटिश का समर्थन करेगी।
  • इस प्रस्ताव के जवाब में लिनलिथगो ने 8 अगस्त, 1940 को अगस्त प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें भारत को डोमेनियन स्टेट का दर्जा देने की बात कही गई।

मुस्लिम लीग की पाकिस्तान की माँग

  • कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले एक मुस्लिम छात्र चौधरी रहमत अली ने 28 जनवरी, 1933 को नाउ आर नेवर नामक एक समाचार-पत्र में पृथक पाकिस्तान राज्य की परिकल्पना की।
  • मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन (22-23 मार्च, 1940) में पहली बार अलग पाकिस्तान के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया।
  • इस सम्मेलन में अध्यक्ष मुहम्मद अली जिन्ना थे।

व्यक्तिगत सत्याग्रह

  • व्यक्तिगत सत्याग्रह 17 अक्टूबर, 1940 को महाराज्ट्र के पवनार आश्रम से शुरू हुआ।
    • गांधीजी ने प्रथम सत्याग्राही के रूप में विनोबा भावे को मनोनीत किया। जवाहरलाल नेहरू दूसरे सत्याग्रही थे।
    • इस आंदोलन को दिल्ली चलो सत्याग्रह भी कहा जाता है।

क्रिप्स प्रस्ताव  (1942)

  • ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल ने 11 मार्च, 1942 को स्टेफर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में क्रिप्स मिशन की घोषणा की।
    • इसके अनुसार युद्ध के बाद भारत को डोमेनियन राज्य का दर्जा एवं संविधान निर्मात्री परिषद् बनाने का प्रस्ताव था।
    • गांधीजी ने क्रिप्स प्रस्तावों को पेास्ट डेटेड चेक कहा।
  • 11 अप्रैल, 1942 को क्रिप्स प्रस्तावों को वापस ले लिया गया।

भारत छोड़ो आंदोलन  (1942)

  • 14 जुलाई, 1942 को अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में वर्धा में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में भारत छोड़ो आंदोलन पर एक प्रस्ताव पारित किया।
  • 8 अगस्त, 1942 को मुम्बई के ग्वालिया टैंक मैदान में अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में कांग्रेस कमेटी की वार्षिक बैठक हुई, जिसमें नेहरू द्वारा प्रस्तुत वर्धा प्रस्ताव की पुष्टि की गई।
  • इस प्रस्ताव का प्रारूप मौलाना अबुल कलाम आजाद ने बनाया था।
  • आंदोलन के समय गांधीजी ने करो या मरो का नारा दिया।
  • यह आंदोलन 9 अगस्त, 1942 से आरम्भ होना था, लेकिन 9 अगस्त को सूर्योदय के पहले ही गांधीजी, नेहरू, पटेल, मौलाना आजाद, सरोजनी नायडू आदि को गिरफ्रतार कर लिया गया।
  • गांधीजी को कस्तूरबा गांधी और सरोजनी नायडू के साथ आगा खाँ पैलेस में रखा गया।
  • जवाहरलाल नेहरू को अल्मोड़ा जेल में, राजेन्द्र प्रसाद को बांकीपुर जेल में और जयप्रकाश नारायण को हजारीबाग जेल में रखा गया।
  • डॉ. राममनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन, अरुणा आसफ अली, जयप्रकाश नारायण (हजारीबाग जेल से फरार होने के बाद) ने भूमिगत रहते हुए आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया।
  • ऊषा मेहता ने 14 अगस्त, 1942 को सर्वप्रथम मुम्बई से रेडियो प्रसारण का कार्य किया।
  • गांधीजी ने 10 फरवरी, 1943 को जेल में 21 दिनों तक उपवास करने की घोषणा की।
  • इस आंदोलन के दौरान गांधीजी के साथ अमेरिकी पत्रकार लुई फिशर भी थे।
  • 23 मार्च, 1943 को मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान दिवस मनाने का निश्चय किया।

समानान्तर सरकार

  • तामलुक जातीय सरकार: इसकी स्थापना बंगाल के मिदनापुर जिले के तामलुक नामक स्थान पर हुई।
    • यहाँ एक सशस्त्र विद्युत वाहिनी का गठन हुआ।
    • बलिया में चित्तू पांडे ने 19 अगस्त, 1942 को समानांतर सरकार स्थापित की।
  • सतारा (महाराष्ट्र) में वाई. पी. चव्हाण और नाना पाटिल ने 1942 में समानांतर सरकार की स्थापना की।

आजाद हिन्द फौज

  • सितम्बर, 1941 में कैप्टन मोहनसिंह के सहयोग से रासबिहारी बोष ने मलाया में आजाद हिन्द फौज की स्थापना की, लेकिन सुभाष चन्द्र बोस ने अक्टूबर, 1943 में सिंगापुर में आजाद हिन्द फौज की स्थापना कर उसमें नई जान डाली।
    • यहीं पर उन्होंने ‘‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा”  और ‘‘दिल्ली चलो”  का नारा दिया।
    • 6 जुलाई, 1944 को आजाद हिन्द रेडियो के प्रसारण में बोस ने गांधीजी को राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित किया।
  • अंग्रेज सरकार ने आजाद हिन्द फौज के गिरफ्रतार मेजर शाहनवाज खाँ, कर्नल प्रेम सहगल और गुरुदयाल सिंह पर नवम्बर, 1945 में दिल्ली के लाल किले में मुकदमा चलाया।
  • बचाव पक्ष के वकीलों में भूलाभाई देसाई के नेतृत्व में तेज बहादुर सप्रू, अरुणा आसफ अली, नेहरू आदि ने अदालत में बहस की।
  • इन अधिकारियों को फांसी की सजा सुनाई गई, लेकिन वेवेल ने उनकी सजा माफ कर दी।

शाही नौसेना विद्रोह

  • एच. एम. आई. एस. तलवार के भारतीय नौसेनिकों ने अंग्रेजों की भेदभावपूर्ण नीति के विरुद्ध 18 फरवरी, 1946 को बंबई में विद्रोह कर दिया।
  • वल्लभभाई पटेल एवं जिन्ना के हस्तक्षेप से यह विद्रोह शांत हुआ।

वैवेल योजना और शिमला सम्मेलन

  • वैवेल योजना मुख्यतः कार्यकारी परिषद् से सम्बन्धित थी।
    • वैवेल योजना के अनुसार 25 जून, 1945 को शिमला में सम्मेलन शुरू हुआ।
    • इसमें कांग्रेस का नेतृत्व अबुल कलाम आजाद ने किया।

कैबिनेट मिशन योजना

  • कैबिनेट मिशन 24 मार्च, 1948 को भारत आया।
  • सर स्टेफर्ड क्रिप्स, अलेक्जेंडर और पेथिक लॉरेंस इसके सदस्य थे।
  • गांधीजी ने कैबिनेट मिशन का समर्थन किया था।
  • कैबिनेट मिशन योजना के अन्तर्गत जुलाई, 1946 में संविधान सभा का गठन किया गया।
  • 16 अगस्त, 1946 को मुस्लिम लीग ने सीधी कार्यवाही दिवस की शुरूआत की।
  • 2 सितंबर, 1946 को नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ।

एटली घोषणा-पत्र

  • ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने हाउस ऑफ कामन्स में 20 फरवरी, 1947 को घोषणा की कि अंग्रेज जून, 1948 के पहले सत्ता भारतीयों को सौंप देना चाहते हैं।
  • इसके तहत लार्ड माउंटबेटन को भारत का नया वायसराय नियुक्त किया गया।

माउंटबेटन योजना (3 जून, 1947)

  • लार्ड माउंटबेटन 22 मार्च, 1947 को भारत के 34वें और अंतिम गवर्नर जनरल बनकर भारत आया।
  • माउंटबेटन ने 15 अगस्त, 1947 को भारतीयों को सत्ता सौंपने का दिन निर्धारित किया।
  • इस योजना को डिकी बर्ड योजना भी कहा जाता है।

भारत स्वतंत्रता अधिनियम, 1947

  • ब्रिटिश संसद ने 18 जुलाई, 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 पारित किया।
  • 14 अगस्त, 1947 को पाकिस्तान और 15 अगस्त, 1947 को भारत अस्तित्व में आया।
  • पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल कायदे आजम मुहम्मद अली जिन्ना बने और लियाकत अली पहले प्रधानमंत्री।
  • माउंटबेटन स्वतंत्र भारत का प्रथम गवर्नर जनरल बना और जवाहरलाल नेहरू प्रथम प्रधानंमत्री बने।
  • स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय और अंतिम गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी बने।

स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई महत्वपूर्ण पुस्तकें

                पुस्तक                                                                              लेखक        

  • यंग इंडिया                                                                        महात्मा गांधी
  • इंडिया डिवाइडेड                                                              राजेन्द्र प्रसाद
  • गीतांजली, गोरा                                                              रबीन्द्रनाथ टैगोर
  • समाजवादी क्यों                                                             जय प्रकाश नारायण
  • अनहैप्पी इंडिया                                                              लाला लाजपतराय
  • गीता रहस्य                                                                      बाल गंगाधर तिलक
  • नील दर्पण                                                                        दीनबंधु मित्र
  • आनंद मठ                                                                        बंकिम चन्द्र चटर्जी
  • इण्डिया रेनेंशा                                                                 सी- एफ- एन्ड्रूज 
  • सिपॉय म्यूटिनी                                                              आर- सी- मजूमदार
  • वार ऑफ इंडिया इंडिपेंडेंस                                            वी- डी- सावरकर
  • सांग ऑफ इंडिया                                                            सरोजनी नायडू
  • ए नेशन इन मेकिंग                                                        सुरेन्द्रनाथ बनर्जी
  • फ्रीडम एट मिडनाइट                                                     लैंपियर
  • न्यू इंडिया                                                                         ऐनी बेसेन्ट
  • पावर्टी एण्ड अन-ब्रिटिश रूल आफ इंडिया                दादाभाई नौरोजी 
  • इंडियन स्ट्रगल                                                                सुभाष चन्द्र बोस
  • इंडिया टुडे                                                                         रजनी पाम दत्त
  • डिस्कवरी आफ इंडिया                                                  जवाहर लाल नेहरू
  • इंडिया विन्स फ्रीडम, अल हिलाल                               अबुल कलाम आजाद 
  • भारत विभाजन के गुनहागार                                       डॉ- राममनोहर लोहिया
  • ब्रोकन विंग                                                                       सरोजनी नायडू
  • द स्टोरी ऑफ माई लाइफ                                             मोरारजी देसाई
  • कामरेड                                                                             मुहम्मद अली
  • इंडिया फार इंडियन्स                                                     चित्तरंजन दास
  • पाथेर देवी                                                                         शरतचन्द्र चट्टðोपाध्याय
  • सत्यार्थ प्रकाश                                                                दयानंद सरस्वती
  • श्याम लाल गुप्त पार्षद ने झंडा गीत की रचना की।
  • मोहम्मद इकबाल ने सारे जहाँ से अच्छा की रचना की।
  • वन्दे मातरम्, बंकिम चन्द्र चटर्जी की पुस्तक आनंद मठ से लिया गया है।

ब्रिटिश काल में भारत में शिक्षा का विकास

      भारत में शिक्षा के प्रति रुझान प्राचीनकाल से ही देखने को मिलता है। प्राचीनकाल में गुरुकुलों, आश्रमों तथा बौद्ध मठों में शिक्षा ग्रहण करने की व्यवस्था थी। तत्कालीन शिक्षा केन्द्रों में नालन्दा, तक्षशिला एवं बल्लभी की गणना की जाती है। मध्यकालीन भारत में शिक्षा मदरसों में प्रदान की जाती थी। मुगल शासकों ने दिल्ली, अजमेर, लखनऊ एवं आगरा में मदरसों का निर्माण करवाया था। भारत में आधुनिक व पाश्चात्य शिक्षा की शुरूआत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के शासनकाल से हुई।

  • सर्वप्रथम 1781 ई. में इंगाल के गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स ने फारसी एवं अरबी भाषा के अध्ययन के लिए कोलकाता में एक मदरसा खुलवाया।
  • 1784 ई. में हेस्टिंग्स के सहयोगी विलियम जोंस ने ‘एशियाटिक सोसाइटी ऑफ इंगाल’ की स्थापना की; जिसने प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति के अध्ययन हेतु प्रयास किया।
  • 1791 ई. में ब्रिटिश रेजिडेंट डंकन ने बनारस में एक संस्कृत विद्यालय की स्थापना की; लेकिन सफलता नही मिली।
  • लॉर्ड वेलेजली ने 1800 ई. में गैर-सैनिक अधिकारियों की शिक्षा हेतु ‘फोर्ट विलियम कॉलेज’ की स्थापना की। इसे 1802 ई. में इन्द कर दिया गया।
  • 1813 ई- के चार्टर एक्ट में सर्वप्रथम शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए धन की व्यवस्था की गई; जिसको भारत में साहित्य के पुनरुद्धार, विकास एवं स्थानीय विद्वानों को प्रोत्साहन देने के लिए खर्च की व्यवस्था की गई।
  • लोक शिक्षा के लिए स्थापित सामान्य समिति के दस सदस्यों में दो दल बन गये; एक आंग्ल या पाश्चात्य शिक्षा का समर्थक था, तो दूसरा प्राच्य शिक्षा का।
  • प्राच्य शिक्षा के समर्थकों का नेतृत्व लोक शिक्षा समिति के सचिव एच. टी. प्रिंसेप ने किया; जबकि पाश्चात्य शिक्षा के समर्थकों का नेतृत्व समिति के मंत्री एच- एच- विल्सन ने किया।
  • प्राच्य शिक्षा के समर्थकों ने हेस्टिंग्स व मिण्टो की शिक्षा की नीति का समर्थन करते हुए संस्कृत और अरबी भाषा का समर्थन किया तथा हिन्दुओं-मुस्लिमों के पुराने साहित्य के पुनरुत्थान को अधिक महत्व दिया।
  • प्राच्य दल के लोग विज्ञान के अध्ययन को महत्व देते हुए शिक्षा का माध्यम ऐसी भाषा में चाहते थे, जो आम भारतीयों के लिए सहज हो। साथ ही ये देशी उच्च शिक्षण संस्थाओं की सुरक्षा की भी मांग करते थे।
  • तत्पश्चात् आंग्ल या पाश्चात्य शिक्षा के समर्थकों का नेतृत्व मुनरो एवं एलफिन्स्टन ने किया। इस दल का समर्थन लॉर्ड मैकाले ने भी किया। इसे ईस्ट इंडिया कम्पनी के नवयुवक अधिकारियों एवं मिशनरियों का समर्थन प्राप्त था।
  • मैकाले भारतीयों में पाश्चात्य शिक्षा के प्रचार के साथ-साथ एक ऐसे समूह का निर्माण करना चाहता था, जो रंग-रक्त से भारतीय हों, परन्तु विचारों, रुचि एवं बुद्धि से अंग्रेज हों।
  • कार्यकारिणी की सदस्य की हैसियत से 2 फरवरी, 1835 ई. को मैकाले ने अपना प्रस्ताव परिषद् के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक ने पूरी तरह स्वीकार कर लिया।
  • मैकाले ने भारतीय संस्कृति की उपेक्षा करते हुए उसे ‘अन्धविश्वासों का भंडार’ बताया था।
  • ‘अधोमुखी निस्यंदन सिद्धान्त (Downward filtration theory), जिसका अर्थ था- शिक्षा समाज के उच्च वर्ग को दी जाये। इस वर्ग से छनकर ही शिक्षा का असर जन-सामान्य तक पहुंचे, को सर्वप्रथम सरकारी नीति के रूप में लॉर्ड ऑकलैण्ड ने लागू किया। ‘वुडडिस्पैच’  के पूर्व तक इसी के तहत भारतीयों को शिक्षा प्रदान किया गया।
  • भारत में आधुनिक शिक्षा का जन्मदाता चार्ल्स ग्रांट को कहा जाता है।
  • शिक्षा के विकास के लिए समय-समय पर अनेक आयोग गठित किये गये।

चार्ल्स वुड का डिस्पैच

  • इसका गठन लार्ड डलहौजी के कार्यकाल (1854 ई.) में हुआ था।
  • इसे भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा भी कहा जाता है।
  • इसके प्रमुख प्रावधानों में पाश्चात्य शिक्षा का प्रसार, उच्च शिक्षा के लिए अंग्रेजी माध्यम और प्राथमिक शिक्षा के लिए जनभाषा तथा मद्रास, कलकत्ता और मुंबई में तीन विश्वविद्यालयों की स्थापना शामिल था।

हंटर शिक्षा आयोग

  • इसका गठन लार्ड रिपन के कार्यकाल (1882-83 ई.) में किया गया।
  • हंटर कमीशन ने प्राथमिक शिक्षा के प्रसार पर बल दिया।

रैले कमीशन

  • इसका गठन वायसराय लार्ड कर्जन के कार्यकाल (1902 ई.) में किया गया।
  • रैले की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय आयोग की स्थापना हुई।
  • 1904 में भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित हुआ।

सैडलर आयोग

  • वर्ष 1917-19 ई. में इस आयोग ने बारह वर्षीय स्कूली शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के बाद स्तानातक की उपाधि के लिए उचित व्यवस्थाओं का प्रावधान किया।

हॉर्टोग समिति

  • वर्ष 1929 ई. में हॉर्टोग समिति का गठन हुआ।
  • इसका प्रमुख उद्देश्य था, प्राथमिक शिक्षा में सुधार एवं केवल प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का प्रावधान।

वर्धा योजना

  • वर्ष 1937 ई. में गांधीजी द्वारा प्रस्तुत इस योजना में सात से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था की।

सार्जेण्ट योजना  (1944)

  • वर्ष 1944 ई. में सार्जेंट योजना के प्रमुख प्रावधान थे- प्राथमिक विद्यालय एवं हाईस्कूल की स्थापना, 6 से 11 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा आदि।

इतिहास में वर्ष 1893

क्रान्तिकारी गतिविधियों की दृष्टि से 1893 ई. का वर्ष अति महत्वपूर्ण है-

  • नासिक में चापेकर बन्धुओं ने इसी वर्ष में एक गुप्त संस्था ‘सोसाइटी फॉर दी रिमूवल ऑफ ऑब्स्टेकल्स टू दी हिन्दू रिलीजन’ की स्थापना की थी।
  • 1893 ई. में 14 वर्ष के बाद योगीराज अरविन्द घोष (1872-1950 ई.) की भारत वापिसी हुई। 1893 में उन्होंने एक लेखमाला ‘न्यू लैंप फॉर ओल्ड’  प्रकाशित किया।
  • 1893 ई. में महात्मा गाँधी (1869-1948 ई.) अब्दुल्ला सेठ नामक व्यापारी के मुकदमे में दक्षिण अफ्रीका गये। इसी वर्ष के 7 जून को दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गाँधी ने प्रथम बार सविनय अवज्ञा का प्रयोग किया था।
  • 16 नवम्बर, 1893 ई. को एनी बेसेंट (1847-1933 ई.) भारत आई। वे वाराणसी शहर में रहने लगीं। उन्होंने भारतीयों से कहा, ‘‘मैं हृदय से तुम्हारे साथ हूँ और संस्कृति से भी मैं तुम्हीं लोगों में से एक हूँ।’’
  • 1893 ई. में स्वामी विवेकानन्द (1863-1902 ई.) अमेरिका के शिकागो शहर पहुँचे। सितम्बर में वहाँ पर हो रहे सर्वधर्म सम्मेलन में पहले ही दिन उन्हें दो मिनट बोलने का समय दिया गया था। जैसे ही उन्होंने अपने वक्तव्य का सम्बोधन ‘अमेरिका के भाइयों एवं बहनों’ के साथ शुरू किया, तालियों की गड़गड़ाहट ने न केवल उन्हें, बल्कि भारत को विश्व के सर्वोच्च देशों में लाकर खड़ाकर दिया। उन्हें ‘तूफानी हिन्दू’  कहा जाने लगा।

भारत में समाचार-पत्रों का विकास

  • भारत में अंग्रेजी भाषा में प्रथम समाचार-पत्र बंगाल गजट था, जिसे 1780 में जेम्स आगस्टस हिक्की ने प्रकाशित किया।
  • भारत में राजा राममोहन राय ने राष्ट्रीय प्रेस की स्थापना की और संवाद कौमुदी, चंद्रिका और मिरात-उल-अखबार का प्रकाशन किया।
  • इन्हें भारतीय पत्रकारिता का अग्रदूत कहा जाता है।
  • मिरात-उल-अखबार फारसी भाषा का पहला सामचार-पत्र था, जग्म-ए- जहाँजुमा, उर्दू का, बंबई समाचार गुजराती भाषा का प्रथम अखबार था।
  • हिन्दी में प्रकाशित होने वाला प्रथम अखबार 1826 में कोलकाता से जुगल किशोर और मन्नू ठाकुर द्वारा सम्पादित उदन्त मार्तण्ड था।
  • किस्ट्रोदास पाल जो हिन्दू पैट्रियाट के संरक्षक थे, उन्हें भारतीय पत्रकारिता का राजकुमार कहा जाता है।
  • तिलक ने अंग्रेजी में मराठा एवं मराठी में केसरी का प्रकाशन किया।
  • बंगाली भाषा का पहला समाचार पत्र दिग्दर्शन था।
  • मालवीय, मकरन्द उपनाम से कविताएं लिखते थे।

प्रेस के विरुद्ध प्रतिबंध

  • चार्ल्स मेटकॉफ को समाचार-पत्रों का मुक्तिदाता कहा जाता है।
  • प्रेस नियंत्रण अधिनियम, 1799: वेलेजली द्वारा लाये गये इस अधिनियम ने सभी समाचार पत्रों पर नियंत्रण लगाते हुए संपादक, मुद्रक तथा मालिक का नाम अखबार में देना अनिवार्य कर दिया।
  • 1818 में हेसि्ंटग ने इस अधिनियम को समाप्त कर दिया।
  • लाइसेंस रेग्युलेशन एक्ट: एडम्स के कार्यकाल में यह अधिनियम लागू हुआ। इसके तहत मुद्रक तथा प्रकाशन को मुद्राणालय स्थापित करने से पूर्व लाइसेंस लेना अनिवार्य था।
  • लिबरेशन ऑफ दि इंडियन प्रेस अधिनियम, 1835;  यह एक उदार अधिनियम था।
  • वर्नाकुलर प्रेस एक्ट (लार्ड लिटन): इसे गैंगिंग एक्ट (मुँह बन्द करने वाला) भी कहते हैं।
  • इसमें मुद्रणालयों की जमानत को मजिस्ट्रेट रद्द कर सकता था।
  • न्यूज पेपर एक्ट, 1908 (लार्ड कर्जन): जो समाचार-पत्र हिंसा या हत्या को बढ़ावा देते हैं, उनकी सम्पत्ति जब्त की जा सकती थी।
  • इंडियन प्रेस इमरजेंसी एक्ट, 1931 (लार्ड इरविन): इसका उद्देश्य 1910 के प्रेस सम्बन्धी नियम को पुनः लागू करना था।

भारत में प्रकाशित प्रमुख समाचार-पत्र

समाचार-पत्र                           संस्थापक                                            वर्ष          स्थान                 भाषा

बंगाल गजट                            जे.ए. हिक्की                                        1780      कलकत्ता          अंग्रेजी

समाचार दर्पण                       मार्शमेन                                               1818      कलकत्ता          बंगाली

दिग्दर्शन                                 मार्शमेन                                               1818      कलकत्ता          बंगाली

संवाद कौमुदी                         राजा राम मोहन राय                          1821      कलकत्ता          बंगाली

बाम्बे समाचार                       फर्दून जी                                              1822      बंबई                    गुजराती

रस्त गुफ़्तार                           दादा भाई नौरोजी                               1851      बंबई                    गुजराती

सत्यप्रकाश                             कर्सनदासभूल जी                              1852      अहमदाबाद       गुजराती

बंबई दर्पण                               बालशास्त्री जाम्बेकर                        1832      बंबई                    मराठी

इंडियन मिरर                          देवेन्द्रनाथ टैगोर, मनमोहन घोष   1861      कलकत्ता          अंग्रेजी

इन्दु प्रकाश                             रानाडे                                                    1861      बंबई                    मराठी

नेटिव ओपिनियन                 वी-एन- मांगलिक                              1864      बंबई                    अंग्रेजी

अमृत बाजार पत्रिका            मोतीलाल घोष                                    1868      कलकत्ता          बंगाली, अंग्रेजी

सोम प्रकाश                             ईश्वरचंद विद्यासागर                      1859      कलकत्ता          बंगाली

हिन्दू                                        वी. राघवाचारी                                    1878      मद्रास                 अंग्रेजी

केसरी, मराठा                         तिलक                                                  1881      बंबई                    मराठी, अंग्रेजी

बंगाली                                      सुरेन्द्रनाथ बनर्जी                              1879      कलकत्ता          अंग्रेजी

कवि वचन सुधा                     भारतेन्दु हरिशचन्द्र                          1867      उत्तर प्रदेश       हिन्दी

यंग इंडिया                               गांधी जी                                               1919      अहमदाबाद       अंग्रेजी

नव जीवन                               गांधी जी                                               1919      अहमदाबाद       हिन्दी, गुजराती

हरिजन                                    गांधी जी                                               1933      पूना                     हिन्दी, गुजराती

हिन्दू पैट्रिया                           हरिशचन्द्र मुखर्जी                             1855      –                           अंग्रेजी

पायोनियर                               –                                                             1865      इलाहाबाद          अंग्रेजी

बंग दर्शन                                 बंकिमचन्द्र चटर्जी                            1873      कलकत्ता          बंगाली

ट्रिब्यून                                     दयाल सिंह मजीठिया                       1877      लाहौर                 अंग्रेजी

सुधारक                                   गोपाल कृष्ण आगरकर                     1888      बंबई                    मराठी

स्टेट्समैन                               राबर्ट नाइट                                          1878      कलकत्ता          अंग्रेजी

इंडियन ओपिनियन              गांधीजी                                                1903      द- अफ्रीका        अंग्रेजी

इंडियन सोशियोलॉजिस्ट    श्यामजी कृष्ण वर्मा                           1905      लंदन                   अंग्रेजी

वन्दे मातरम                          अरविन्द घोष                                      1906      कलकत्ता          अंग्रेजी

युगान्तर                                  बारीन्द्र घोष, भूपेन्द्र घोष                 1906      कलकत्ता          बंगाली

वन्दे मातरम                          हरदयाल, श्यामजी वर्मा                   1909      पेरिस                  अंग्रेजी

गदर                                          लाला हरदयाल                                    1913      सेन फ्रांसिस्को  अंग्रेजी

बाम्बे क्रानिकल                     फिरोजशाह मेहता                              1913      बंबई                    अंग्रेजी

कामनव्हील                            ऐनी बेसेंट                                             1914      बंबई                    अंग्रेजी

न्यू इंडिया                                ऐनी बेसेंट                                             1914      बंबई                    अंग्रेजी

हिन्द केसरी                            गंगा प्रसाद गुप्त                                 1914      काशी                  हिन्दी

सर्वेन्टस ऑफ इंडिया           श्रीनिवास शास्त्री                                1918      मद्रास                 अंग्रेजी

हिन्दुस्तान टाइम्स               के. एन. पणिक्कर                              1922      बंबई                    अंग्रेजी

सर्चलाइट                                सच्चिदानन्द सिन्हा                         1818      –                           अंग्रेजी

स्वदेश मित्र                            जी. एस. अय्यर                                  –              मद्रास                 –

ब्रिटिश शासन के विरुद्ध महत्वपूर्ण आंदोलन/विद्रोह

आन्दोलन/विद्रोह              नेतृत्व                                                   वर्ष                   प्रभावित क्षेत्र

संन्यासी विद्रोह                   केना सरकार                                        1760-1800     बंगाल बिहार

फकीर विद्रोह                       मजनूशाह, चिराग अली                    1776-77         बंगाल

पागलपंथी विद्रोह               करमशाह, टीपू मीर                           1813-31         बंगाल

फरैजी आंदोलन                  मो- मोहसीन (दादू मीर)                   1820-58         बंगाल

कोल विद्रोह                          बुद्धोभगत                                             1831-32         छोटानागपुर

कूका आंदोलन                    भगवत जवाहरमल                            1860-70         पंजाब

वेलुटंपी विद्रोह                     मेलुथम्पी                                             1808-09         त्रवणकोर (केरल)

संथाल विद्रोह                      सिद्ध-कान्हू                                          1855-56         बिहार, बंगाल

मुण्डा विद्रोह                        बिरसा मुण्डा                                        1893-1900     झारखंड (बिहार)

खासी विद्रोह                        तीरथ सिंह                                           1828-33         मेघालय

रम्पा विद्रोह                         राजू रम्पा, अल्लूरी सीताराम राजू 1880                गोदावरी जिला (आन्ध्र प्रदेश)

मोपला विद्रोह                      अली मुसलियार                                 1836-54         मालाबार (केरल)

नागा आंदोलन                    रानी गैडनलियु                                    1826दृ1866   मणिपुर

नील आंदोलन                     दिगम्बर                                               1859-60         नादिया, बंगाल

ताना भगत आंदोलन         जतरा भगत                                         1914                बिहार

रामोसी विद्रोह                     वासुदेव बलवंत फड़के                       1877-87         महाराष्ट्र

वहाबी आंदोलन                  अब्दुल वहाब                                       1820-70         बिहार, उत्तर प्रदेश

पाबना विद्रोह                       केशवचन्द्र राय, शम्भूनाथ पाल     1873-76         बंगाल

भील विद्रोह                          सेवाराम                                                1825-31         पश्चिमी घाट

चेरो आंदोलन                      भूषण सिंह                                           1800-1802     बिहार

पायकों का विद्रोह               जगबन्धु                                              1817-1818     ओडिशा

अहोम विद्रोह                       गदाधर, कुमार रूपचन्द                   1828                असम

तेभागा आंदोलन                 कम्पाराम सिंह                                   1946                बंगाल

तेलंगाना विद्रोह                  –                                                             1946-51         आन्ध्र प्रदेश

प्रमुख आयोग

आयोग                        वर्ष                                क्षेत्र                                                     गवर्नर जनरल/वायसराय         

हंटर                              1802                             शिक्षा                                                 लार्ड रिपन     

रेले                                1902                             शिक्षा                                                 कर्जन

सैडलर                         1917                             शिक्षा                                                 चेम्सफोर्ड     

हार्टोग                          1929                             शिक्षा                                                 इरविन

एचिंसन                      1886                             लोक सेवा                                          डफरिन          

ली                                 1923                             लोक सेवा                                          रीडिंग

हरशेल                         1893                             मुद्रा                                                    लैन्सडाउन   

स्मिथ                          1919                             मुद्रा                                                    चेम्सफोर्ड

हिल्टन यंग                1925                             मुद्रा                                                    चेम्सफोर्ड     

सप्रू                               1934                             बेरोजगारी                                         विलिंगटन

व्हिटले                        1929                             श्रम                                                    –      

मैकलागन                  1914                             सहकारी                                            हार्डिंग्ज

बटलर                          1927                             देशी राज्यों के साथ सम्बन्ध      इरविन           

फ्रेजर                           1901-02                      पुलिस सुधार                                    कर्जन

पिल                             1936                             संघीय ढाँचा                                      विलिंग्टन

स्ट्रैची                           1878-80                      अकाल से सम्बन्धित                  –      

फॉसेट                          –                                    चुंगी व वेतन से सम्बन्धित        –

प्रमुख उपाधियाँ

उपाधियां                                                 प्राप्तकर्ता                                                      दाता

महात्मा                                                   महात्मा गांधी                                               रवीन्द्रनाथ टैगोर

अर्द्धनंगा फकीर                                      महात्मा गांधी                                               विंस्टन चर्चिल

देशद्रोही फकीर                                      महात्मा गांधी                                               विंस्टन चर्चिल

वन मैन बाउंड्री फोर्स                             महात्मा गांधी                                               लार्ड माउण्ट  बेटन 

राष्ट्रपिता                                                महात्मा गांधी                                               सुभाषचन्द्र बोस

नेताजी                                                     सुभाषचन्द्र बोस                                           एडोल्फ हिटलर

गुरुदेव                                                      रवीन्द्रनाथ टैगोर                                         महात्मा गांधी

सरदार                                                     वल्लभाई पटेल                                             बारदौली की महिलाएं

कायदे आजम                                        मो. अली जिन्ना                                          महात्मा गांधी

देशनायक                                               सुभाषचंद्र बोस                                             रवीन्द्रनाथ टैगोर

देशरत्न                                                   राजेन्द्र प्रसाद                                               महात्मा गांधी

भारत के महान शहीद

वासुदेव बलवन्त फड़के

एक सशस्त्र सेना बनाने व ब्रिटिश सरकार के विरोध करने के आरोप में 21 जुलाई, 1879 को गिरफ्तार, कालापानी की सजा हुई। इसके विरोधस्वरूप अनशन करते हुए 17 फरवरी, 1883 को प्राण त्याग दिये।

दामोदर चापेकर

22 जून, 1897 को प्लेग कमिश्नर रैण्ड एवं लेफ्रिटनेन्ट एयर्स्ट की हत्या के आरोप में अपने भाइयों के साथ गिरफ्तार। 18 अप्रैल, 1898 को इन्हें फाँसी दे दी गई। इनके भाई वासुदेव चापेकर को 8 मई एवं बालकृष्ण चापेकर को 22 मई, 1899 को फाँसी दी गई।

खुदीराम बोस

1908 में सेशन जज किंग्सपफ़ोर्ड की गाड़ी पर बम फेंकने के कारण बेड़ी रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार। 11 अगस्त, 1908 को इन्हें फाँसी दे दी।

मदनलाल धींगरा

1 जुलाई, 1909 को कर्नल विलियम कर्जन वाइली (राजनीतिक सलाहकार) की हत्या के आरोप में गिरफ्तार। 16 अगस्त, 1909 को इन्हें फाँसी दे दी गई।

अशफाकउल्ला खाँ

19 अगस्त, 1925 को काकोरी डाकगाड़ी डकैती केस के अभियोग में गिरफ्तार। 18 दिसम्बर, 1927 को इन्हें फाँसी दे दी गई।

ऊधमसिंह

13 मार्च, 1940 को सर माइकल-ओ-डायर को कैक्सटन हॉल (लन्दन) में गोली मारने के कारण गिरफ्तार हुए। 31 जुलाई, 1940 को इन्हें फाँसी दे दी गई।

भगतसिंह

सॉण्डर्स की हत्या तथा 8 अप्रैल, 1929 को केन्द्रीय विधानसभा में बम फेंकने के आरोप में गिरफ्तार हुए। सॉण्डर्स की हत्या के केस में मौत की सजा हुई। इन्हें 23 मार्च, 1931 को केन्द्रीय जेल (लाहौर) में फाँसी दे दी गई।

सुखदेव

सॉण्डर्स की हत्या के आरोप में 15 अप्रैल, 1929 को गिरफ्तार हुए। 23 मार्च, 1931 को भगतसिंह के साथ इन्हें फाँसी दे दी गई।

राजगुरु

17 दिसम्बर, 1928 को सॉण्डर्स की हत्या के आरोप में 30 दिसम्बर, 1929 को पुणे में गिरफ्तार। 23 मार्च, 1931 को भगतसिंह के साथ इन्हें फाँसी दे दी गई।

बटुकेश्वर दत्त

भगतसिंह के साथ केन्द्रीय असेम्बली में बम फेंकने के आरोप में गिरफ्तार हुए। इन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई।

चन्द्रशेखर आजाद

काकोरी डाकगाड़ी डकैती के मुख्य अभियुक्त तथा अन्य वारदातों के आरोप में अंग्रेज सरकार ने इन्हें जिन्दा या मुर्दा पकड़ने के लिए 30 हजार रुपये पुरस्कार की घोषणा की थी। 27 फरवरी, 1931 को अल्फ्रेड पार्क (इलाहाबाद) में शहीद हो गये।

मास्टर अमीचन्द

दिल्ली षड़यन्त्र के प्रमुख क्रान्तिकारी अमीचन्द फरवरी, 1914 में वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की हत्या के आरोप में बन्दी बनाये गये। 8 मई, 1915 को इन्हें चार साथियों के साथ फाँसी दे दी गई।

अवधबिहारी बोस

दिल्ली षड़यन्त्र एवं लाहौर बम काण्ड के आरोप में फरवरी, 1914 में गिरफ्तार हुए। 8 मई, 1914 को इन्हें फाँसी दे दी गई।

करतार सिंह सराबा

गदर पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता एवं लाहौर सैनिक षड़यन्त्र के कारण गिरफ्तार किये गये। 16 नवम्बर, 1915 को इन्हें फाँसी दे दी गई।

राजेन्द्र लाहिड़ी

दक्षिणेश्वर बम काण्ड तथा काकोरी डाकगाड़ी डकैती काण्ड के आरोप में गिरफ्तार हुए। 17 दिसम्बर, 1927 को गोण्डा की जेल में इन्हें फाँसी दे दी गई।

अनन्त कान्हरे

नासिक के जैक्सन हत्याकाण्ड के प्रमुख अभियुक्त होने के कारण गिरफ्तार। 19 अप्रैल, 1910 को इन्हें फाँसी दे दी गई।

सुभाष चन्द्र बोस

21 अक्टूबर, 1943 को सिंगापुर में आजाद भारत के अस्थायी सरकार की स्थापना की घोषणा की तथा जापानी सेना की सहायता से अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह पर कब्जा करते हुए 1944 में भारतीय सीमा के इम्फाल क्षेत्र में प्रवेश किया। 18 अगस्त, 1945 को वायुयान दुर्घटना में मृत्यु हो गई; लेकिन यह प्रामाणिक नहीं है।

विष्णु गणेश पिंगल

23 मार्च, 1915 को बमों के साथ गिरफ्तार हुए। 17 नवम्बर, 1915 को इन्हें फाँसी दे दी गई।

लाला लाजपत राय

17 नवम्बर, 1928 को साइमन कमीशन का विरोध करने पर पुलिस के बर्बर लाठी के प्रहार से घायल एवं एक माह बाद निधन हो गया।

ब्रिटिश शासन की भूराजस्व नीतियाँ

स्थाई बंदोबस्त

  • इस व्यवस्था का जन्मदाता जॉन शोर है।
  • इसे इस्तमरारी, चिरस्थायी या जमींदारी बंदोबस्त भी कहा जाता था।
  • यह 1793 में लार्ड कार्नवालिस द्वारा बिहार, बंगाल और ओडिशा में लागू की गई।
  • किसानों के भूमि सम्बन्धी अधिकार समाप्त कर जमींदारों को भूमि मालिक बनाया गया।
  • जमींदारों को भू-राजस्व की दर तय करने की छूट मिल गई थी।
  • इस व्यवस्था में जॉन शोर एवं जेम्स ग्राण्ड भी जुडे़ थे।

रैयतवाड़ी व्यवस्था

  • इसके जन्मदाता थामस मुनरो एवं कैप्टन रीड थे। यह व्यवस्था मद्रास एवं मुम्बई में लागू की गई।
  • इसके अन्तर्गत प्रत्येक जमीन धारक को भू-स्वामी स्वीकार करके उसके साथ लगान की शर्तें तय की गईं।

महालवाड़ी बन्दोबस्त

  • इस पद्धति के जन्मदाता हाल मैकेंजी थे।
  • इस व्यवस्था के अन्तर्गत दक्कन के कुछ जिले, संयुक्त प्रांत, आगरा, अवध, मध्य प्रांत और पंजाब के कुछ हिस्से भी शामिल थे।
  • इसकी व्यवस्था में प्रत्येक महाल (जागीर या गाँव) के अनुसार अंग्रेजों ने राजस्व निश्चित किये।

कम्पनी के अधीन बंगाल भारत के गवर्नर एवं वायसराय

बंगाल के गवर्नर

राबर्ट क्लाइव (1757-60 – 1765-67)

  • क्लाइव बंगाल का पहला गवर्नर जनरल था।
  • अवध के नवाब शुजाउद्दौला एवं शाह आलम के साथ 1765 में इलाहाबाद की संधि हुई। बक्सर का युद्ध इसी के शासन काल में लड़ा गया।
  • इसने बंगाल में द्वैध शासन की व्यवस्था की, जिसके तहत राजस्व वसूलने, सैनिक संरक्षण एवं विदेशी मामले कम्पनी के अधीन थे, जबकि शासन चलाने की जिम्मेदारी नवाब के हाथों में थी।

विशेष: अन्य गवर्नर बरेलास्ट (1767-69 ई.), कार्टियर (1769-72 ई.), वॉरेन हेस्टिंग्स (1772-74 ई.)।

कम्पनी के अधीन गवर्नर जनरल

वॉरेन हेसि्ंटग्स (1773-1785)

  • रेग्यूलेटिंग एक्ट 1773 ई. के अनुसार बंगाल के गवर्नर को अब अंग्रेजी क्षेत्रें का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा, जिसका कार्यकाल 5 वर्षों का निर्धारित था। मद्रास व बम्बई इसके अधीन हो गये, इस प्रकार यह भारत का पहला गवर्नर जनरल था।
  • यह कम्पनी के एक क्लर्क के रूप में 1750 में कोलकाता आया था, अपनी कार्यकुशलता के कारण वह कई ऊँचाईयाँ छुई।
  • हेसि्ंटग्स को भारत में न्यायिक सेवा का जन्मदाता माना जाता है।
  • वह पहला गवर्नर जनरल था जिस पर इंग्लैंड लौटने पर महाभियोग चलाया गया।
  • 1784 में विलियम जोन्स के साथ मिलकर एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना की।

लार्ड कार्नवालिस (1786-93)

  • इसे भारत में सिविल सेवा का जनक माना जाता है।
  • इसने बंगाल, बिहार में स्थायी बंदोबस्त लागू किया।
  • इसी के शासन में ‘बोर्ड ऑफ रेवेन्यू’  की स्थापना हुई थी।
  • कार्नवालिस की मृत्यु उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में हुई।

सर जॉन शोर (1793-98)

  • इसके समय 1795 में निजाम तथा मराठों के बीच खेड़ा की लड़ाई हुई।

लार्ड वेलेजली (1798-1805)

  • भारतीय राज्यों को अंग्रेजी परिधि में लाने के लिए सहायक संधि प्रणाली का प्रयोग किया।
  • 1800 में कोलकाता में फोर्ट विलियम कालेज की स्थापना की।
  • 1802 में पेशवा बाजीराव द्वितीय के साथ बेसीन की संधि की।

सर जार्ज बार्लो (1805-1807)

  • होल्कर के साथ सहायक संधि (राजपुरघाट की संधि) की।
  • 1806 में वेल्लोर में हुई सिपाही विद्रोह इसके काल की प्रमुख घटना है।

लार्ड मिन्टो प्रथम (1807-1813)

  • 1809 में महाराजा रंजीत सिंह के साथ अमृतसर की संधि की।
  • इसी के कार्यकाल में चार्टर एक्ट 1813 पारित हुआ था।

लार्ड हेसि्ंटग (1813-1823)

  • अंग्रेज-नेपाल युद्ध (1814-16)  तथा संगोली की संधि।
  • इसके समय में पिंडारियों का दमन हुआ एवं मराठों की शक्ति को पूरी तरह से नष्ट कर दिया।
  • मद्रास में टामस मुनरो द्वारा रैयतवाड़ी की व्यवस्था लागू की गई।

लार्ड एमहर्स्ट (1823-28)

  • 1824 में बैरकपुर का सैन्य विद्रोह इसी के समय हुआ था।
  • प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध (1824-26) ।

लार्ड विलियम बैंटिंक (1828-35)

  • सती प्रथा का अंत (1829), कर्नल स्लीमैन की सहायता से ठगी का अंत (1830)। रंजीत सिंह के साथ निरंतर मित्रता की संधि।
  • 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया। इस प्रकार यह भारत का पहला गवर्नर जनरल हुआ।
  • इसी काल में मैकाले की अनुशंसा पर अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम बनाया गया। इसने भारतीयों को उत्तरदायी पदों पर नियुक्त किया।

चार्ल्स मैटकॉफ (1835-36)

  • इसे भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता के रूप में जाना जाता है।

लार्ड आकलैंड (1836-42)

  • 1839 में इसने कोलकाता से दिल्ली तक ग्रैंड ट्रंक रोड का मरम्मत करवाया।
  • प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध (1836-42) एवं ग्वालियर के साथ युद्ध (1843)।

लार्ड एलेनबरो (1842-44)

  • प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध समाप्त हुआ। 1843 में दास प्रथा का अन्त।
  • इसने सिन्धु को अगस्त, 1843 में ब्रिटिश साम्राज्य में पूर्णतः मिला लिया।
  • इसका कार्यकाल कुशल अकर्मण्यता की नीति का काल कहा जाता है।

लार्ड हार्डिंग (1844-48)

  • प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध तथा लाहौर की संधि (1846)।
  • ओडिशा में खोंडो के बीच प्रचलित नर बलि की प्रथा को समाप्त किया।

लार्ड डलहौजी (1848-56)

  • व्यपगत के सिद्धांत (Doctrine of lapse) की नीति से सतारा (1848), जैतपुर व संभलपुर (1849), उदयपुर (1852), झांसी (1853), नागपुर (1854) तथा कुशासन के आरोप में अवध (1856) को कंपनी में मिलाया।
  • रेलवे माइनूट, 1853 में बंबई से थाणे तक रेल का परिचालन।
  • 1854 के डाक टिकट का प्रचलन, पहली बार सार्वजनिक निर्माण विभाग तथा लोक शिक्षा विभाग (1854) की स्थापना।
  • इसने शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया।

वायसराय

लार्ड कैनिंग (1856-62)

  • यह कंपनी का अंतिम गवर्नर जनरल एवं भारत का पहला वायसराय था।
  • 1857 के विद्रोह के समय कैनिंग गवर्नर-जनरल था।
  • यूरोपीय सेना द्वारा श्वेत विद्रोह (1859) ।
  • भारतीय विधि संहिता (1859), भारतीय दण्ड संहिता (1860) का निर्माण।

लार्ड एल्गिन (1862-63)

  • पश्चिम-उत्तर सीमा प्रांत में कबाइलियों के दमन के लिए अम्ब्रेला अभियान।
  • विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहन।

सर जान लॉरेन्स (1864-69)

  • 1865 में कलकत्ता, बंबई तथा मद्रास उच्च न्यायालयों की स्थापना।
  • इसने हेनरी कैम्पवेल के नेतृत्व में एक अकाल आयोग का गठन किया।
  • इसने 1865 में भारत-यूरोप के बीच प्रथम समुद्री टेलीग्राफ सेवा शुरू की।

लार्ड मेयो (1869-72)

  • 1871 में भारत की प्रथम जनगणना।
  • कठियावाड़ में राजकोट कॉलेज, अजमेर में मेयो कालेज तथा भारतीय सांख्यिकी सर्वेक्षण, कृषि एवं वाणिज्य विभाग (1872) की स्थापना।

लार्ड नार्थब्रुक (1872-76)

  • पंजाब में प्रसिद्ध कूका विद्रोह (1872)  इसके काल में हुआ।
  • ब्रह्म मैरिज एक्ट, 1872 पारित कर बाल विवाह पर प्रतिबन्ध।

लार्ड लिटन (1876-80)

  • यह एक प्रसिद्ध उपन्यासकार, निबन्ध लेखक एवं साहित्यकार था। साहित्य जगत में इसे ‘ओवन मैरिडिथ’ के नाम से जाना जाता है।
  • रिचर्ड स्ट्रैची की अध्यक्षता में प्रथम अकाल आयोग की नियुक्ति।
  • महारानी विक्टोरिया को केसर-ए-हिन्द की उपाधि प्रदान करने के लिए 1 जनवरी, 1877 को दिल्ली दरबार का आयोजन।
  • वर्नाकुलर प्रेस एक्ट, 1878 के तहत भारतीय भाजा के समाचार पत्रें पर प्रतिबंध लगाया। पायनियर अखबार ने इसका समर्थन किया था।
  • आर्म्स एक्ट (1878) पारित। इसके तहत भारतीयों को हथियार से प्रतिबन्धित।
  • लिटन ने अलीगढ़ में एक ‘मुस्लिम-ऐंग्लो प्राच्य महाविद्यालय’ की स्थापना तथा सिविल सेवा परीक्षा की उम्र को घटाकर 21 से 19 वर्ष किया।

लार्ड रिपन (1880-84)

  • फ्रलोरेंस नाइटिंगेल ने इन्हें भारत का उद्धारक कहा।
  • इन्हें स्थानीय स्वशासन का जनक भी कहा गया। प्रेस से प्रतिबन्ध हटाया।
  • प्रथम वास्तविक जनगणना 1881 में हुई।
  • रिपन ने 1881 में प्रथम कारखाना अधिनियम लाया।
  • इल्बर्ट बिल विवाद (1883-84) के कारण इन्हें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व त्यागपत्र देना पड़ा। इस विवाद को ‘श्वेत विद्रोह’ कहा जाता है।

लार्ड डफरिन (1884-88)

  • इसके समय (1885-88) तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध हुआ, बर्मा को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया।
  • 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना।

लार्ड लैन्सडाउन (1888-94)

  • भारत और अफगानिस्तान के मध्य सीमा निर्धारण हेतु डुरण्ड आयोग की स्थापना (1893) ।
  • इसने 1891 में दूसरा कारखाना अधिनियम लाया, इसके तहत महिलाओं से 11 घंटे प्रतिदिन से अधिक काम पर प्रतिबन्ध एवं सप्ताह में एक दिन अवकाश की व्यवस्था।

लार्ड एल्गिन द्वितीय (1894-99)

  • 1895-98 में अकाल। इसकी जाँच के लिए लायल आयोग का गठन।
  • इसने कहा था- ‘‘भारत को तलवार के बल पर विजित किया गया है और तलवार के बल पर इसकी रक्षा की जायेगी।”

लार्ड कर्जन (1899-1905)

  • फ्रेजर की अध्यक्षता में पुलिस आयोग, स्काट मानक्रीफ की अध्यक्षता में सिंचाई आयोग एवं रैले की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय आयोग की स्थापना।
  • मैकडोनाल्ड की अध्यक्षता में अकाल आयोग का गठन।
  • 1903 में पुलिस विभाग में सी.आई.डी. की स्थापना।
  • पूसा (बिहार) में कृषि अनुसंधान केन्द्र की स्थापना और 1905 में रेलवे बोर्ड एवं इसी वर्ष कालकाता में विक्टोरिया मेमोरियल की स्थापना।

लार्ड मिंटो द्वितीय (1905-1910)

  • ढाका में आगा खाँ और सलीम उल्ला खाँ द्वारा मुस्लिम लीग की स्थापना।
  • स्वदेशी आंदोलन।  1907 में सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन।
  • मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम, 1909 लागू; मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन व्यवस्था।

लार्ड हार्डिंग द्वितीय (1910-1916)

  • 12 दिसम्बर, 1911 को ब्रिटेन सम्राट जॉर्ज पंचम का भारत आगमन, बंगाल विभाजन रद्द और राजधानी कलकत्ता से दिल्ली हस्तांतरित करने की घोषणा।
  • 23 दिसम्बर, 1912 को दिल्ली में हार्डिंग पर बम फेंका गया, इस अपराध में भाई बालमुकुन्द को फाँसी की सजा।
  • 28 जुलाई, 1914 को प्रथम विश्वयुद्ध की शुरूआत।
  • 1916 में वाराणसी में मदन मोहन मालवीय द्वारा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय एवं हिन्दू महासभा की स्थापना।
  • 1913 में रबीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार।

लार्ड चेम्सफोर्ड (1916-21)

  • कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन (1916) में कांग्रेस का एकीकरण एवं मुस्लिम लीग से समझौता।
  • पूना में डी. के. कर्वे द्वारा 1916 में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना।
  • 1919 के संवैधानिक सुधार अधिनियम द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन लागू।
  • 1919 में रौलेट एक्ट पारित एवं 13 अप्रैल, 1919 को जालियाँवाला बाग (अमृतसर) हत्याकाण्ड हुआ।
  • खिलाफत आन्दोलन एवं असहयोग आन्दोलन शुरू।

लार्ड रीडिंग (1921-26)

  • प्रिंस ऑफ वेल्स का भारत आगमन, केरल में मोपला विद्रोह।
  • एम. एन. राय द्वारा भारतीय साम्यवादी दल का गठन (1921)।
  • 5 फरवरी, 1922 को चौरी-चौरा काण्ड, असहयोग आन्दोलन स्थगित।
  • 1922 में कलकत्ता में विश्व भारती विश्वविद्यालय ने कार्य प्रारम्भ किया।
  • भारत में 1922 से इलाहाबाद में सिविल सेवा परीक्षा की शुरूआत।
  • 1923 में चित्तरंजन दास, मोतीलाल नेहरू द्वारा स्वराज पार्टी की स्थापना। 1923 के चुनाव में इस दल को मध्य प्रान्त एवं बंगाल में पूर्ण बहुमत।
  • द्वैध शासन के मूल्यांकन के लिए मूडीमैन कमिटी का गठन (1924)।

लार्ड इरविन (1926-31)

  • 1927 में साइमन कमीशन की नियुक्ति।
  • 1929 में शारदा एक्ट पारित।
  • 1929 में लाला लाजपत राय की मृत्यु एवं असेम्बली में बम फेंका गया।
  • 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज्य’ की माँग। 26 जनवरी, 1930 को स्वतन्त्रता दिवस मनाने की घोषणा।
  • 12 नवम्बर, 1930 को लन्दन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन।
  • 4 मार्च, 1931 को गांधी-इरविन समझौता। सविनय अवज्ञा आन्दोलन स्थगित।

लार्ड वेलिंगटन (1931-36)

  • 17 सितम्बर से 1 दिसम्बर, 1931 तक द्वितीय एवं 17 नवम्बर से 24 दिसम्बर, 1932 को तृतीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन।
  • 3 जनवरी, 1932 से दुबारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू।
  • इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून की 1932 में स्थापित।
  • 16 अगस्त, 1932 को रैम्जे मैकडोनाल्ड ने विवादास्पद ‘साम्प्रदायिक पंचाट’ की घोषणा की। इसके तहत दलितों को अलग से मतदान की व्यवस्था।
  • 24 सितम्बर, 1932 को पूना समझौता हुआ।
  • भारत सरकार अधिनियम, 1935 द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त और केन्द्र में शुरू।
  • लार्ड वेलिंगटन ने कांग्रेस के मुम्बई अधिवेशन (1935) में हिस्सा लिया। इसकी अध्यक्षता सर सत्येन्द्र प्रसन्न सिन्हा ने की थी।

लार्ड लिनलिथगो (1936-44)

  • इसके कार्यकाल में पहली बार चुनाव कराये गये; जिसमें कांग्रेस ने 11 में से 8 राज्यों (बॉम्बे, मद्रास, बिहार, संयुक्त प्रान्त, उड़ीसा, उत्तर-पश्चिम सीमान्त प्रान्त एवं असम) में अपनी सरकार बनाई।
  • 1 मई, 1939 को सुभाषचन्द्र बोस ने ‘फारवर्ड ब्लॉक’ नामक पार्टी बनाई।
  • 1 दिसम्बर, 1939 को द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरूआत।
  • 1940 में लीग के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पाकिस्तान की माँग की गईं।
  • 8 अगस्त, 1940 को अंग्रेजों द्वारा ‘अगस्त प्रस्ताव’ लाया गया।
  • 10 मई, 1940 को विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने। 1953 में इन्हें साहित्य का नोबल पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
  • 1942 में क्रिप्स मिशन भारत आया।
  • 9 अगस्त, 1942 को भारत छोड़ो आन्दोलन शुरू।
  • 1943 में बंगाल में भयानक अकाल पड़ा।

लार्ड वेवेल (1944-47)

  • 1944 में सी. राजगोपालाचारी ने सी.आर. फार्मूला प्रस्तुत किया। इसे जिन्ना ने ‘गाड़ी को घोड़े के आगे लगाया गया है’ कह, अस्वीकार कर दिया था।
  • 1945 में शिमला समझौता हुआ।
  • 22 मार्च, 1946 को कैबिनेट मिशन भारत आया।
  • मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त, 1946 को सीधी कार्यवाही दिवस का आयोजन किया।
  • 20 फरवरी, 1946 को ब्रिटिश प्रधानमन्त्री लॉर्ड क्लीमेन्ट एटली (लेबर पार्टी) ने हाउस ऑफ कॉमंस में जून, 1948 तक प्रभुसत्ता भारतीयों को सौंपने की घोषणा की।
  • सच्चिदानन्द सिन्हा की अध्यक्षता में संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को हुई।

लार्ड माउण्टबेटेन (मार्च, 1947-जून, 1948)

  • सत्ता हस्तान्तरण के लिए 24 मार्च, 1947 को भारत का गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटेन को बनाया गया।
  • 3 जून, 1947 को भारत विभाजन की माउंटबेटेन योजना की घोषणा की गई।
  • 4 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद में एटली द्वारा भारतीय स्वतन्त्रता विधेयक प्रस्तुत किया गया, जिसे 18 जुलाई को स्वीकृति मिली।
  • 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतन्त्र हुआ।
  • स्वतन्त्र भारत का प्रथम गवर्नर जनरल गवर्नर लॉर्ड माउंटबेटेन को बनाया गया।

सी. राजगोपालाचारी (1948-50)

  • स्वतन्त्र भारत के पहले एवं अन्तिम भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी हुए।
  • 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही भारत में गवर्नर जनरल का पद समाप्त हो गया।
  • राजेन्द्र प्रसाद गणतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।

ब्रिटिशकाल में विदेशों में भेजे गए शिष्टमंडल

   वर्ष                     शिष्टमंडल                                          देश                               गवर्नर जनरल/वायसराय

  • 1787 ई.    किर्क पैट्रिक शिष्टमंडल                   नेपाल                          कार्नवालिस
  • 1797 ई.    मेलकम शिष्टमंडल (1)                    ईरान                            वेलेजली
  • 1808 ई.    एलफिंस्टन शिष्टमंडल                    काबुल                          मिन्टो
  • 1808 ई.    मेलकम शिष्टमंडल (2)                    ईरान                            मिन्टो
  • 1809 ई.    डेविड सेटान शिष्टमंडल                   सिंध                             मिन्टो
  • 1892 ई.    रॉबर्ट्स शिष्टमंडल                            काबुल                          लैंसडाऊन
  • 1893 ई.    हेनरी डूरंड शिष्टमंडल                       काबुल                          लेंसडाऊन
  • 1903 ई.    यंग हस्बैंड शिष्टमंडल                      तिब्बत                        कर्जन
  • 1904 ई.    डेन शिष्टमंडल                                   काबुल                          कर्जन
  • 1912 ई.    डा. अंसारी मिशन (चिकित्सा)        तुर्की                             हार्डिंग
  • 1938 ई.    डा. अटल मिशन (चिकित्सा)          चीन                             लिनलिथगो

ब्रिटिशकालीन आयोग एवं समितियाँ

वर्ष       आयोग/समितियां                   अध्यक्ष                           गवर्नर जन./     उद्देश्य                                                                                          वायसराय                                               

1852   इनाम आयोग                            इनाम                              डलहौजी             भूमि सम्बन्धी विवेचना

1880   दुर्भिक्ष आयोग                           रिचर्ड स्ट्रेची                   लिटन                 अकाल निवारण हेतु विचार

1882   हंटर आयोग                               विलियम हंटर               रिपन                  शिक्षा का विकास

1886   एचिन्सन आयोग                     चार्ल्स एचिन्सन          डफरिन              नागरिक सेवा में भारतीयों की                                                                संख्या में वृद्धि पर विचार

1893   अफीम आयोग                          विलियम ग्लैड्स्टोन    लैंसडाउन           अफीम सेवन को रोकने हेतु

1893   हरशेल समिति                          हरशेल                             लैंसडाउन           टकसाल सम्बन्धी सुझाव

1898   दुर्भिक्ष आयोग                           जेम्स लायल                 एल्गिन              प्रथम दुर्भिक्ष आयोग की रिपोर्ट पर                                                       विचार

1901   दुर्भिक्ष आयोग                           एंथनी मेक्डोनाल्ड        कर्जन                 द्वितीय दुर्भिक्ष आयोग की रिपोर्ट                                                        पर सुझाव

1901   सिंचाई आयोग                          वोल्विन स्कॉट             कर्जन                 सिंचाई में सुधार हेतु वित्तीय विचार

1902   विश्वविद्यालय आयोग          थॉमस रैले                      कर्जन                 भारतीय विश्वविद्यालय की स्थिति                                                   पर विचार

1902   फ्रेजर आयोग                             फ्रेजर                               कर्जन                 पुलिस की कार्य-पद्धति पर विचार

1912   इसलिंग्टन आयोग                   इसलिंग्टन                     हॉर्डिंग्ज              नागरिक सेवा में भारतीयों की                                                                हिस्सेदारी पर विचार

1914   मेक्लेगन समिति                     मेक्लेगन                        हॉर्डिंग्ज              सरकारी वित्तीय अवस्था से                                                                  सम्बन्धित सुझाव

1917   सेडलर आयोग                           माइकल सेडलर            चेम्सफोर्ड          कलकत्ता विश्वविद्यालय में दोषों                                                      की  जाँच

1923   भारतीय छँटनी समिति          लॉर्ड इंचकैप                   रीडिंग                 शिक्षा सम्बन्धी विचार हेतु

1924   ली आयोग                                  लॉर्ड ली                           रीडिंग                 लोकसेवा आयोग के गठन की                                                                अनुशंसा

1925   सेण्डहर्स्ट समिति                     एण्ड्रयू स्कीन                 रीडिंग                 भारतीय सेना का भारतीयकरण पर                                                      विचार

1927   बटलर समिति                          हरकोर्ट बटलर               इरविन               देशी राज्यों व अंग्रेजी सरकार के                                                            सम्बन्धों पर विचार

1927   साइमन आयोग                        जॉन साइमन                 इरविन               1919 ई. के अधिनियम की समीक्षा                                                       हेतु

1928   लिनलिथगो आयोग                 लिनलिथगो                   इरविन               कृषि सम्बन्धी समस्याओं पर                                                               विचार

1928   ह्निटले आयोग                         जे. एच. ह्निटले           इरविन               श्रमिकों की स्थिति पर विचार

1929   लिंड्से आयोग                           लिंड्से                             इरविन               भारत में मिशनरी शिक्षा के विकास                                                      हेतु

1929   भारतीय वैधानिक आयोग      फिलिप हर्टोग                इरविन               शिक्षा की स्थिति की समीक्षा करने                                                      हेतु

1934   सप्रू समिति                                तेजबहादुर सप्रू              विलिंगटन         बेरोजगारी की समस्या की समीक्षा                                                       हेतु

1935   भारतीय परिसीमन समिति   लॉरी हेमण्ड                    विलिंगटन         निर्वाचन क्षेत्रें की अवस्था हेतु

1938   राष्ट्रीय योजना समिति          जवाहरलाल नेहरू         लिनलिथगो      आर्थिक योजना

1942   क्रिप्स आयोग                           स्टेफोर्ड क्रिप्स              लिनलिथगो      भारत के राजनीतिक गतिरोध दूर                                                         करने हेतु

1943   दुर्भिक्ष आयोग                           सर वुड                            वेवल                   बंगाल के अकाल के कारणों पर                                                                                                                   विचार हेतु

1944   सार्जेण्ट आयोग                        जॉन सार्जेण्ट                 वेवल                   शिक्षा के विकास हेतु

1946   कैबिनेट आयोग                        पैथिक लॉरेंस                 वेवल                   भारतीयों को सत्ता हस्तान्तरित                                                          करने पर विचार हेतु

राष्ट्रीय स्वतन्त्रता आंदोलन सम्बन्धी प्रमुख वचन एवं नारे

    प्रसिद्ध वचन                                                                                                                      सम्बद्ध व्यक्ति    

  • स्वराज हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है।                                                                       -बाल गंगाधर तिलक
  • सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।                                                               -रामप्रसाद बिस्मिल
  • सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।                                                                          -मो. इकबाल
  • जय हिन्द।                                                                                                                          -सुभाषचन्द्र बोस
  • इन्कलाब जिन्दाबाद।                                                                                                      -मो. इकबाल
  • दिल्ली चलो।                                                                                                                      -सुभाषचन्द्र बोस
  • करो या मरो।                                                                                                                      -महात्मा गांधी
  • मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के कफन में कील सिद्ध होगी।        -लाला लाजपत राय
  • भारत को तलवार के बल पर जीता गया था और तलवार के बल पर ही उसे ब्रिटानी कब्जे में रखा जाएगा।           -लार्ड एल्गिन (द्वितीय)
  • वन्दे मातरम्।                                                                                                                    -बंकिम चन्द्र चटर्जी
  • पूर्ण स्वराज।                                                                                                                      -जवाहरलाल नेहरू
  • हिन्दी, हिन्दू, हिन्दोस्तान।                                                                                            -भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  • तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा।                                                                       -सुभाषचद्र बोस
  • समूचा भारत एक विशाल बन्दीगृह है।                                                                         -सी. आर. दास
  • यह एक ऐसा चेक था, जिसका बैंक पहले ही नष्ट हो जाने वाला था।  

 -महात्मा गांधी (क्रिप्स प्रस्ताव के संदर्भ में)

  • हमने घुटने टेककर रोटी माँगी, किन्तु उत्तर में हमें पत्थर मिले।

-महात्मा गांधी (सविनय अवज्ञा आंदोलन के पूर्व)

  • विजयी विश्व तिरंगा प्यारा।                                                                                           -श्याम लाल गुप्ता पार्षद
  • वेदों की ओर लौटो।                                                                                                           -दयानन्द सरस्वती

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