ये बड़े बड़े मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर राजा, महाराजा, बादशाह यानि शासकों ने बनवाये क्योंकि उनकी अपने आराध्यों में आस्था थी, वो बहुत बड़े भक्त होते थे, उनसे बड़े भक्त तो अभी के युग में नहीं ही हैं!
तो सवाल है कि उस शक्ति ने उन्हें क्यों नहीं बचाया?
उनके राजपाट क्यों खत्म हो गये? शासकों में भक्ति भावना तो बहुत थी तो ऐसा क्यों हुआ?
जवाब है कि धर्म और सामाजिक, राजनीतिक विकास अलग अलग चीजें हैं.
जैसे-जैसे सामाजिक, राजनीतिक विकास हुआ, दुनिया भर में राजशाही खत्म होती चली गयी.
समाज के इस विकास से सर्वशक्तिमान शक्ति भी उन्हें नहीं बचा पायी.
खास बात ये है कि ये परिवर्तन आम आदमी के बलिदानों, संघषों से आये.
सार रूप में कह सकते हैं कि धर्म में आस्था, आपका निहायत ही निजी मसला है और सामाजिक आस्था -सामाजिक, राजनीतिक मामला है!
यदि आप दोनों को मिलाएंगे तो देश औऱ देश की आम जनता को बर्वादी के अलावा कुछ नहीं मिल सकता. इसमें सर्वशक्तिमान शक्ति, जिसे भी आप मानते हैं, आपकी बर्बादी को नहीं रोक सकती. क्योंकि मूर्खता तो आप करे और उस शक्ति से चाहे कि वो आपको बचाये आपको विनाश से!
हाँ ,धर्म और राजनीति को मिलाने वालों स्वार्थी तत्वों को जरूर इससे फायदा होता है.
देश के संसाधनों पर उनका कब्जा हो जाएगा. और आम जनता उनकी गुलाम बन जायेगी.
आज देश में यही दौर चल रहा है;और हम उनके धर्म, राजनीति के खेल में फँस कर ताली पीट पीट कर खुशी खुशी आत्महत्या करने पर उतारू हैं!
इसलिये समय रहते चेत जाईये, नहीं तो हम-आपके बच्चों का भविष्य नर्क बनाने के लिये आप जिम्मेदार होंगें, ना कि आपका आराध्य, जिसे आप मानते हैं.
— Sanjiv Gupta