वर्तमान में सत्ता पक्षा तो एक जुट होकर जो काम रहा है वो किसी से छुपा नहीं है, लेकिन विपक्ष को किसने मना किया हैं एक जुट होकर विरोध करने के लिए, लेकिन पिछले छः वर्षो से देखने से मालूम पढ़ता है कि, किसी भी सत्ता पक्ष के गलत नीति के विरोध में न तो विपक्ष और न ही सामाजिक संगठन एक मंच के बैनर तले एक जुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर पाया है, इससे तो ये ही लगता है कि हर कोई सामाजिक व राजनैतिक संगठन अपने स्वयं के व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए काम कर रहा है न कि गरीब मजदूर जनता के लिए।
जब कोई जनहित विरोधीनीति सरकार लागू करती है तो विपक्ष क्यों नहीं एक मंच पर एक साथ विरोध के लिए उतरता है, सोचे और समझे भविष्य आम व्यक्ति और उसके बच्चे का ही प्रभावित हो रहा है।