सरकार मदारी की तरह देश में एक्शन (असली काम) और डिशेप्शन (दिखावा) का खेल खेल रही है.

दैनिक समाचार

एक तरफ मोदी जी विदेश जाके ड्रामा करते हैं , उन्हें पता है मीडिया में ये खबर पूरा स्पेस घेर लेगी और पीछे से भारत में LIC का IPO आ जाता है. मीडिया में LIC का नाम भी नहीं आया.

इधर सरकार ₹5,000 करोड़ की “परम हंस” को सिर्फ ₹211 करोड़ में अम्बानी के एजेंट को बेच देती है. और उधर राहुल गांधी की क्लब वाली क्लिप आती है और सारी मिडिया उसी में लग जाती है. और परम हंस पर कही डिबेट भी नहीं हुयी, न विरोध हुआ!

किसी का ध्यान न जाए इस लिए योगी जी, जो अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी नहीं गए, वो कैमरामैन का पूरा दल लेके अपनी माता के पास फोटो खिंचाने पहुँच गए.

अब आप उनकी बुराई करो या तारीफ बस बिजी रहो.

पीछे से जो लूट मची है उधर ध्यान नहीं जाना चाहिए.

जेबकतरा जब किसी की जेब काटने वाला होता है, तो उससे कंधे पर टकरा जाता है और ठीक उसी मोमेंट में वो उसकी जेब से पर्स निकालता है!

इंसान का दिमाग एक बार में एक जगह ही फोकस कर सकता है.
इस लिए उसका दिमाग कंधे पर लगे धक्के पर जाता है और जेब से बटुआ निकलने की हलचल को महसूस ही नहीं कर पाता है.

सरकार जो PSU बेच रही वो आपका ही पैसा है.

कल जब जरूरत पड़ेगी तो पेट्रोल डीजल पर टैक्स या बैंको के चार्ज, ब्याज इत्यादि बड़ा कर आपसे ही फिरसे वसूला जायेगा.

कालचक्र

मीडिया के लिए ही रहत इंदौरी ने लिखा था:

वो बुलाती है मगर जाने का नहीं..
भक्ति कर मगर, उसमे डूब जाने का नहीं ?

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