
दुखद समाचार मिला कि मेरे लघु भ्राता समान मित्र एवं “सत्ता चिन्तन” के “कलमवीर” श्री अनूप त्रिपाठी “अन्नू” (कानपुर नगर) 15 जनवरी, 2022 को प्रातः 5 बजे इस दुनिया को अलविदा कह हमसे दूर हमेशा-हमेशा के लिए चले गए, जहां से कोई वापिस नहीं लौटता।
यह दुखद जानकारी मुझे उसी दिन रात को उनके बड़े भैय्या एवं “सत्ता चिन्तन” से लगभग 20 वर्षों से जुड़े आदरणीय श्री सुधाकर त्रिपाठी “छन्नू” भैय्या ने दी। एकाएक उनकी बातों पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन भरोसा करना पड़ा।
श्री अनूप त्रिपाठी “अन्नू” बीस वर्षों से “सत्ता चिन्तन” से जुड़े रहे। उनकी कलम में वह धार थी, जिसे प्रकाशित कर सत्ता चिन्तन सूर्खियां बटोरता था। उनके लिखने की शैली में बोलचाल भाषा व सच्चाई को बयां करने वाली आक्रामकता भी थी, जो अब हमें पढ़ने को नहीं मिलेगा।
हमें याद है कि उन्होंने 2007 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व “उत्तर प्रदेश में चुनावी सुनामी की आशंका” लेख लिखा था। प्रकाशित होने के बाद लेख चर्चा में रहा, लेकिन बहुचर्चित तब हुआ, जब विधानसभा चुनाव का परिणाम आया। प्रचंड बहुमत पाकर बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनी।
ऐसे अनेकों उदाहरण हैं, उनके लेखों के। सूझ-बूझ एवं सरल भाषा की लेखनी ही समाचार पत्रों का श्रृंगार होता है। विरले कलमकार ही इसे समझकर लेखों में जान डालने का काम करते हैं।
मेरी “अन्नू” जी से अन्तिम मुलाकात अक्टूबर, 2021 के पहले सप्ताह में हुई थी। उनके साथ “सत्ता चिन्तन” प्रकाशन के सम्बन्ध में रणनीतिक वार्ता हुई थी। उनकी सोच थी कि इस बार “सत्ता चिन्तन” को प्रकाशित कर वह स्थान दिलाने का काम करना है, जो लोगों की पसंदीदा बने और पाठक उसे ढूंढ़कर पढ़ने का प्रयास करें।
अब वह तो नहीं हैं, लेकिन मेरा प्रयास रहेगा कि उनसे अन्तिम मुलाकात में हुई वार्ता के अनुसार अपने सहयोगियों के साथ “सत्ता चिन्तन” को वह सम्मान व स्थान दिला सकूं। हमें पूर्ण विश्वास है कि उनके बड़े भैय्या श्री सुधाकर “छन्नू” जी त्रिपाठी, जो उनके साहित्यिक गुरु भी हैं, वे “अन्नू” जी की कमी को दूर करने का प्रयास करेंगे।
पुनः “सत्ता चिन्तन परिवार” की तरफ से शत् शत् नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
“अन्नू जी” आप मेरी यादों में हमेशा रहेंगे!
जे. एल. ज्वलन्त चौरसिया
प्रधान सम्पादक, सत्ता चिन्तन