गुजरात में गुजरात शासन का मॉडल देखो। कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हॉल मीटिंग कर रहे थे, उन तमाम कर्मचारियों को गिरफ्तार कर पुलिस उठा ले गई और मीटिंग नहीं करने दी। इस तरह की तानाशाही है, गुजरात मॉडल की पुलिस की। हाल मीटिंग के लिए परमिशन लेने की कहीं आवश्यकता नहीं है, संवैधानिक अधिकार है, उसके बाद भी गुजरात में पूरी गुंडागर्दी के साथ पुलिस तमाम आंदोलन को कुचल रही है। कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग कर रहे हैं। संविदा कर्मचारियों को स्थाई करने की मांग कर रहे हैं।
फिक्स वेतन पर कर्मचारियों रखने की प्रथा को खत्म करने की मांग रखने के लिए वह एक हाल में मीटिंग कर रहे थे। हॉल में मीटिंग शांतिपूर्वक करने के बावजूद सरकार ने पुलिस का सहारा ले मीटिंग नहीं होने दी और सभी नेताओं को मीटिंग शुरू होने से पहले गिरफ्तार कर जबरदस्ती थाने में ले गई।
यह है मोदी जी का गुजरात मॉडल। लोकतंत्र नहीं तानाशाही चल रही है। कोई विरोध की आवाज नहीं उठा सकता। गुजरात में सूपड़ा साफ होने वाला है।